पश्चिमी रेलवे के एक अधिकार ने बताया कि उन्हें बायो टॉयलेट से संबंधित बहुत सी शिकायतें मिलीं कि उनमें बदबू आ रही है या वो गंदगी से भरे हुए हैं। इनका मुख्य कारण है कि यात्रियों को बायो टॉयलेट का इस्तेमाल करना नहीं आता और वह टॉयलेट में ही प्लास्टिक आदि फेंक देते हैं।
सीएजी की रिपोर्ट में ये भी सामने आया है कि दक्षिणी रेलवे के अलावा किसी और जोन में बायो टॉयलेट की जागरुकता के लिए कोई अभियान नहीं चलाया गया।
सेंट्रल रेलवे के अधिकारी ने कहा कि बायो टॉयलेट की साफ सफाई और रखरखाव के लिए रेलवे स्टाफ को ट्रेनिंग देना बहुत महत्वपूर्ण है। इसमें ट्रेनिंग तब दी जा सकती है जब ट्रेन स्टेशन पर रुकें। इसके साथ ही ट्रेन में सवार स्टाफ को भी ट्रेनिंग दी जाएगी। रेलवे का ये उद्देश्य होगा कि ग्रीन स्टेशन्स बनाए जाएं यानि सभी स्टेशन 100 फीसदी बायो टॉयलेट युक्त हों। इससे रेलवे ट्रैक भी बिल्कुल साफ रहेंगे। इस योजना के तहत कटरा का श्री माता वैष्णों देवी स्टेशन, रामेश्वरम, मछलीपटनम और पोरबंदर का ओखा स्टेशन शामिल हैं।