वित्त मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि पहले उन कर्मियों के मामले में ईपीपीओ जारी किया जाए, जो अपना सेवाकाल पूरा कर रिटायर होते हैं। इसके बाद रिटायरमेंट की दूसरी श्रेणियों के मामले में ईपीपीओ जारी किया जाएगा। जैसे कोई कार्मिक, जिसे दंड की वजह से तय अवधि से पहले ही सेवा छोड़नी पड़ी हो। विकलांगता, स्वैच्छिक रिटायरमेंट या किसी अन्य कारण से सेवा में नहीं रहने वाले कर्मियों के मामले में भी ईपीपीओ योजना लागू की जाएगी। पहली जुलाई से तय श्रेणी में सौ फीसदी ईपीपीओ जारी होगा। अगर किसी विभाग को ईपीपीओ जारी करने में कोई दिक्कत हो रही है तो वह एक सप्ताह के अंदर भारत के महालेखा नियंत्रक कार्यालय को अवगत करा दे।
बता दें कि सरकारी कर्मियों की पूरी सर्विस खत्म होने के बाद जब रिटायरमेंट की तारीख निकट आती है तो उससे दो तीन माह पहले ही उनके पेंशन के कागजात तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है। इसके बावजूद अनेक कर्मियों की पेंशन तैयार होने में कई तरह के झंझट सामने आते हैं। कर्मियों की लापरवाही इसकी एक बड़ी वजह है। फाइलें जब एक मेज से दूसरी मेज पर घूमती हैं तो कई बार अहम दस्तावेज गायब हो जाता है। कर्मी छुट्टी पर है, साहब के साइन नहीं हुए हैं, पेंशन तैयार होने के मामलों में देरी के लिए ऐसे कारण सामने आते हैं।
अगर कोई कर्मी किसी वजह से सेवा पूरी करने से पहले ही रिटायरमेंट लेता है या जबरन दे दी जाती है तो ऐसे मामले में कर्मी को पेंशन कागजात तैयार कराने में खूब पसीना बहाना पड़ता है। पीपीओ इतनी आसानी से उपलब्ध नहीं कराया जाता। कई माह तक कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं। अगर किसी के पास पीपीओ की फाइल है और वह गुम हो जाए तो उसे दोबारा से जारी कराने के लिए 'पहाड़ पर चढ़ने' जितनी मेहनत करनी पड़ती है। रिटायरमेंट के बाद लोन लेना है, सीजीएचएस कार्ड बनवाना है और दूसरे कई फायदे तभी मिल पाते हैं, जब कर्मी के पास पीपीओ होता है।