विश्व हिंदू परिषद (विहिप) लंबे समय से यह मांग करती रही है कि हिंदुओं के मंदिरों पर से सरकार का नियंत्रण समाप्त होना चाहिए। अदालतों ने भी कई अवसरों पर कहा है कि मंदिरों का संचालन सरकार का कार्य नहीं है। इसके बाद भी सरकारों ने अब तक मंदिरों पर से अपना नियंत्रण नहीं छोड़ा है। तिरुपति मन्दिर के लड्डू प्रसाद में कथित पशु की चर्बी और मछली का तेल पाए जाने के विवाद के बाद विहिप ने यह मांग और तेज कर दी है कि मंदिरों का संचालन उसी समाज को सौंप दिया जाना चाहिए जो उस मंदिर के लिए आस्थावान हो।
विहिप की यह भी मांग है कि मंदिरों की कमाई हिंदू समुदाय की भलाई के लिए ही उपयोग की जानी चाहिए। विहिप और कई अन्य हिंदू संगठनों का आरोप है कि मंदिरों की आय सरकारें दूसरे धर्मों के लिए उपयोग कर रही हैं। इसके लिए विहिप राष्ट्रीय स्तर पर 'हिंदुओं की आस्था का धन हिन्दू समाज के लिए' (Hindus' Money For Hindus' Society) अभियान चलाएगा।
विहिप के अंतरराष्ट्रीय सहमहासचिव डॉ. सुरेंद्र जैन ने अमर उजाला से बातचीत में आरोप लगाया कि राजस्थान की पूर्ववर्ती सरकार ने एक मंदिर की कमाई मुस्लिम समुदाय से जुड़े संगठन को दिया था। स्थानीय लोगों ने इसका विरोध भी किया, लेकिन इसके बाद भी राज्य सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया और हिन्दू मंदिरों से मिली आय को दूसरे धर्मों को आर्थिक सहायता देना जारी रखा।
विहिप का कहना है कि मंदिरों में केवल पूजा-पाठ और विवाह जैसे सामाजिक-धार्मिक कार्य ही नहीं होते। मन्दिरों की कमाई का उपयोग स्कूल चलाने, संस्कृत भाषा का प्रचार-प्रसार करने, गरीब बेटियों का विवाह कराने, गरीब युवाओं को स्किल ट्रेनिंग देने जैसे कार्यों के लिए किया जा सकता है।
डॉ. सुरेंद्र जैन ने कहा कि तिरुपति मन्दिर विवाद ने यह बता दिया है कि सरकार मन्दिरों के संचालन में प्रभावी नहीं है, जबकि ठीक इसी समय अयोध्या के राममंदिर और दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर सहित सैकड़ों ऐसे बड़े मन्दिर हैं जिनका संचालन उसी समुदाय के द्वारा किया जा रहा है। इन मंदिरों का संचालन, स्वच्छता और सुरक्षा सरकार नियंत्रित मन्दिरों से बहुत अधिक बेहतर है।
उन्होंने कहा कि उनका प्रयास है कि ऐसी व्यवस्था बने जिसमें किसी राज्य के सभी मंदिरों का संचालन उसी राज्य की बनी एक शीर्ष कमेटी के द्वारा किया जाए। सरकार का इस पर नियंत्रण न हो। लेकिन सुरक्षा सुनिश्चित कराने में सरकारी अधिकारियों की भागीदारी रहे। हालांकि, इसके बाद भी सरकारी अधिकारियों को कमेटी की बैठकों में किसी मुद्दे पर वोटिंग का अधिकार न हो। जैन के अनुसार, अयोध्या के राममंदिर का संचालन इस समय इसी तरीके से किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में खानपान से जुड़ी दुकानों पर दुकानदार और मैनेजर का नाम लिखना अनिवार्य कर दिया है? जबकि इसके पूर्व कांवड़ यात्रा के दौरान योगी आदित्यनाथ सरकार का इसी तरह का एक प्रयास अदालत के निर्देश के बाद समाप्त कर दिया गया था। क्या यह उचित है? अमर उजाला के इस प्रश्न पर विहिप नेता ने कहा कि जिस तरह खाने-पीने की चीजों में मूत्र और अन्य गन्दे पदार्थ मिलाये जाने की खबरें सामने आई हैं, उसे देखते हुए सरकार के इस प्रयास की सराहना की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसे किसी समुदाय से जोड़कर देखने की बजाय लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जोड़कर देखना चाहिए।