मौसम के शुरुआती झटके के बाद आम के लिए मुफीद हुए मौसम ने मैंगो एक्सपोर्टरों की उम्मीदें जगा दी हैं। पिछले वर्ष के मुकाबले जिले में 70 फीसदी अधिक पैदावार होने का अनुमान है। इसी के साथ अभी तक खाड़ी देशों में बढ़त बनाए पाकिस्तानी आम बागबानों से टक्कर लेने की तैयारियां शुरू कर दी गईं हैं।
सऊदी अरब, कवैत, दुबई, बहरीन समेत सिंगापुर, मलेशिया आदि के व्यापारियों ने आम के लिए अमरोहा के बागबानों से संपर्क भी शुरू कर दिया है। लंगड़ा की मांग सबसे ज्यादा है। फिलहाल अमरोहा से कितना आम खाड़ी के देशों में जाएगा इसका फैसला अप्रैल में रियाद में होने वाली आम के निर्यातकों और व्यापारियों की बैठक के बाद होगा।
अमरोहा में करीब छह हजार हेक्टेयर में आम के बगीचे हैं। पिछले महीने आंधी बारिश से आम के बौर पर कुछ असर पड़ा था, लेकिन इसके बाद मौसम ठीक रहा। इससे पेड़ अमिया से लदे हुए हैं। आम उत्पादकों का अनुमान है कि, इस बार पिछले वर्ष के मुकाबले 70 फीसदी पैदावार अधिक होगी। अधिक पैदावार होने से आम के व्यापारियों ने निर्यात की रणनीति भी बनानी शुरू कर दी है। फिलहाल दूसरे देशों के कारोबारियों ने लंगड़ा, दशहरी और चौसा के लिए डिमांड की है।
जलमार्ग से जाएगा आम
जलमार्ग से जाएगा आम
निर्यातक इस बार जलमार्ग (पानी के जहाज) से आपूर्ति करने की योजना बना रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि, इससे पहले हम वायु मार्ग से निर्यात करते थे, जो ज्यादा खर्चीला है। वायु मार्ग से निर्यात में प्रति किलो 50 रुपये तो जल मार्ग से 10 से 15 रुपये का खर्च आएगा। लागत अधिक होने से हम पाकिस्तानी कारोबारियों से पिछड़ जाते थे और मार्केट पर वे 80 फीसदी तक कब्जा कर लेते थे। इसके अलावा कुछ आम कीनिया और स्थानीय व्यापारियों का भी होता था, लेकिन इस बार हम उन्हें कड़ी टक्कर देंगे।
बेपर हीट ट्रीटमेंट (तकनीक) से होगी पैकिंग
अमरोहा में पैकिंग हाउस की मंजूरी मिल चुकी है। कारोबारियों का कहना है कि, जल्द ही बेपर हीट ट्रीटमेंट(बीएचटी) तकनीक से पैकिंग की मशीन लग जाएगी। इसके बाद पैकिंग होने से आम जल्द खराब नहीं होगा। इससे व्यापारियों को लाभ मिलेगा। इस तकनीक की मशीन अभी सहारनपुर मंडी में लगाई गई है।
आम निर्यात: आंकड़ों की नजर
पाकिस्तानी आम को भारतीय आम देगा टक्कर
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
2014 में अमरोहा से तकरीबन 55 मीट्रिक टन आम खाड़ी देशों में भेजा गया था, मगर 2015 में आम पर दाग लग जाने से निर्यात प्रभावित हुआ। इस साल सिर्फ 20 मीट्रिक टन आम का निर्यात किया जा सका, मगर इस बार अच्छे मौसम और अमियों का देखते हुए तकरीबन 400 मीट्रिक टन आम के निर्यात की तैयारी की जा रही है।
इस बार पिछले साल के मुकाबले आम की 70 फीसदी पैदावार अधिक होने का अनुमान है। मौसम बेहतर बना रहा तो यह रिकार्ड पैदावार होगी। खाड़ी देशों से आम की लगातार डिमांड आ रही है। इस बार जलमार्ग से आम का निर्यात होने से हम भारतीय आम के मुकाबले पाकिस्तानी आम के बाजार पर कब्जा कर लेंगे, ऐसी उम्मीद है।
-नदीम सिद्दीकी अध्यक्ष, उप्र आम निर्यातक एसोसिएशन