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फायरिंग और दुश्मन की साजिश के बीच गुजरता है बॉर्डर के 14 हजार गांवों का जीवन, हैरान कर देगी इनकी कहानी

Sat, 23 May 2020 07:44 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा, नियंत्रण रेखा और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर एक किलोमीटर से लेकर 10 किलोमीटर तक के क्षेत्र में ये 14 हजार गांव स्थित हैं। गुजरात जैसे राज्य में तो सीमावर्ती इलाका काफी विस्तृत है...
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बीएसएफ के जवान - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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अंतरराष्ट्रीय सीमा पर 'भारतीय सीमा' में रहने वाले लोगों का जीवन फायरिंग और दुश्मन की साजिश के बीच गुजरता है। किसी को यह नहीं मालूम कि गोली कब और किस तरफ से आएगी।

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कभी-कभार तो दुश्मन की तोप का गोला इन लोगों के घरों, पशुओं या खेतों में गिर पड़ता है। ये कहानी बॉर्डर के 14 हजार गांवों में रहने वाले उन ग्रामीणों की है, जो बहादुरों से कम नहीं हैं। बहुत से ग्रामीण तो ऐसे हैं, जिनके खेत अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर और फेंसिंग के बीच में हैं।

वे बीएसएफ या दूसरी फोर्स जो उस बॉर्डर पर तैनात है, उसकी इजाजत से अपने खेतों में काम करने जाते हैं। ये फोर्स उनकी सबसे बड़ी मददगार है। कोरोना जैसी महामारी हो या अन्य कोई प्राकृतिक आपदा, ये फोर्स ही उन ग्रामीणों की सहायता करने के लिए सबसे पहले पहुंचती है।

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अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा, नियंत्रण रेखा और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर एक किलोमीटर से लेकर 10 किलोमीटर तक के क्षेत्र में ये 14 हजार गांव स्थित हैं। गुजरात जैसे राज्य में तो सीमावर्ती इलाका काफी विस्तृत है।

अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, त्रिपुरा, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल में 111 जिलों के 396 ब्लॉक में ये 14 हजार गांव आते हैं।

खासतौर पर पाकिस्तान से लगते भारतीय बॉर्डर के जम्मू-कश्मीर और पंजाब जैसे राज्यों में रह रहे लोगों को सबसे ज्यादा खतरनाक स्थिति का सामना करना पड़ता है। कई बार तो सीमा पार से जब भारी फायरिंग होती है, तो गांव खाली करा लिए जाते हैं।

ऐसे मौके भी आते हैं, जब लोगों को सचेत करने का समय ही नहीं मिलता। ऐसी स्थिति में लोग खुद ही अपना बचाव करते हैं। वे बंकरों में घुस जाते हैं। हालांकि जैसे ही सीमा पार से गोलीबारी शरू होती है, तो भारतीय पक्ष की तरफ से उसका मुंह तोड़ जवाब दिया जाता है।

भारत सरकार के फंड के अलावा केंद्रीय गृह मंत्रालय भी सिविक एक्शन प्रोग्राम के लिए अलग से राशि जारी करता है। इसकी मदद से सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों का जीवन आसान बनाया जाता है। कई ऐसे गांव भी हैं, जिन्हें आदर्श गांव का दर्जा दिया गया है। इनके लिए अलग से राशि जारी होती है।

प्रोग्राम के तहत किए जाते हैं ये सभी काम

बीएसएफ प्रवक्ता शुभेंदु भारद्वाज बताते हैं कि सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की मदद करने के लिए भारतीय सुरक्षा बल सदैव तत्पर रहते हैं। यहां तक कि कई इलाकों में तो शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल कूद और दूसरी मूलभूत जरूरतें जैसे, पीने का साफ पानी तक मुहैया कराया जाता है।

कहीं कोई सड़क टूट गई है तो उसे भी ठीक करा देते हैं। भारत सरकार, सीमावर्ती राज्यों के साथ मिलकर 'बॉर्डर एक्शन डेवेलपमेंट प्रोग्राम' बनाती है। इसमें बॉर्डर की सुरक्षा कर रहे बल से बाकायदा यह राय ली जाती है कि वहां पर आधारभूत विकास का खाका कैसे खींचा जाए।

बीएसएफ ने बॉर्डर पर रहने वाले लोगों को मोबाइल टॉयलेट तक मुहैया कराए हैं। कोरोना संक्रमण के दौरान गुवाहाटी फ्रंटियर में लोगों के लिए बॉर्डर पर ही मोबाइल एटीएम सुविधा शुरू कराई गई। वहां कोई बीमार होता है तो वे बीएसएफ के पास पहुंच जाते हैं।

ऐसे मामलों में बीएसएफ के डॉक्टर उनका इलाज करते हैं। गंभीर केस है तो उसे निकटवर्ती सिविल अस्पताल तक पहुंचा देते हैं। भारद्वाज के अनुसार, हम उन लोगों की हर तरह से मदद करते हैं। हमारा काम विश्वास और सुरक्षा की भावना पैदा करना है।

साथ ही ये लोग खुफिया जानकारी जुटाने में भी बल की मदद करते हैं। चूंकि इनके खेत सीमा रेखा के दूसरी ओर होते हैं, इसलिए वे दूसरे देश की सीमा में हो रही गतिविधियों की जानकारी दे देते हैं।

कोई संदिग्ध वस्तु, उपकरण या व्यक्ति उन्हें दिखता है, तो वे निकटवर्ती जवान को बता देते हैं। ऐसे में वे हमारे लिए सहयोगी का काम भी करते हैं।

2018-19 के दौरान केंद्र और राज्यों द्वारा जारी की गई राशि 

राज्य केंद्रीय अंश राज्य अंश कुल राशि (करोड़ में)
अरुणाचल प्रदेश        80.87                  89.86  8.99   89.86
असम 49.50 5.50 55
बिहार 32.20 21.47 53.67
गुजरात 56.23 37.49 93.72
हिमाचल प्रदेश 25.95 2.88 28.83
जम्मू-कश्मीर 84.00 9.33 93.33
मणिपुर 20.34 2.26 22.60
मेघालय 22.69 2.52 25.21
मिजोरम 32.20 3.58 35.78
नागालैंड 33.96 3.77 37.73
पंजाब 33.08 22.05 55.13
राजस्थान 81.20 54.13 135.33
सिक्किम 27.50 3.06 30.56
त्रिपुरा 49.70 5.52 55.22
उत्तर प्रदेश 26.60 17.73 44.33
उत्तराखंड 29.20 3.24 32.44
पश्चिम बंगाल 85.40 56.93 142.33
कुल 770.62 260.46 1031.08

 

2016-17 में सीमावर्ती क्षेत्रों के आदर्श गांव 

राज्य गांव राशि (करोड़ में)
हिमाचल प्रदेश 2 6.00
जम्मू-कश्मीर 24 55.50
मणिपुर 3 6.00
मेघालय 7 11.67
नागालैंड 1 2.15
राजस्थान 3 9.00

2017-18 में सीमावर्ती क्षेत्रों के गांव 

अरुणाचल प्रदेश      18             33.14 करोड़ 

मणिपुर                 3              2.56 करोड़

कोरोना की लड़ाई में आगे रहे हैं सीमावर्ती इलाकों के लोग

सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को कोरोना से बचाव की जानकारी दी गई। जवानों ने उन्हें सोशल डिस्टेंसिंग और स्वच्छता का मतलब समझाया। उन्हें मास्क, सैनिटाइजर और साबुन मुहैया कराया गया। उन्हें राशन भी दिया गया।

बॉर्डर पर तैनात सुरक्षा बल, कोरोना की लड़ाई में स्थानीय लोगों को साथ लेकर आगे बढ़े। भले ही वहां की अधिकांश आबादी ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं है, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग का पालन उन्होंने ऐसे सीखा, जैसे वे सदियों से ऐसा करते आ रहे हों।

अपने घरों के आसपास, राशन लेते वक्त और खेत-खलिहानों में कुछ काम है तो वे सुरक्षा बलों द्वारा पढ़ाए गए पाठ को याद रखते हैं।

अरुणाचल प्रदेश, लद्दाख, पिथौरागढ़, किन्नौर घाटी, गुवाहाटी, पंजाब, राजस्थान, जोशीमठ और श्रीनगर सहित अनेक ऐसे क्षेत्र हैं, जहां पर ग्रामीणों के साथ मिलकर सुरक्षा बलों ने कोरोना को हराने के लिए एक अभेद दीवार खड़ी कर दी है।

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