बीएसएफ प्रवक्ता शुभेंदु भारद्वाज बताते हैं कि सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की मदद करने के लिए भारतीय सुरक्षा बल सदैव तत्पर रहते हैं। यहां तक कि कई इलाकों में तो शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल कूद और दूसरी मूलभूत जरूरतें जैसे, पीने का साफ पानी तक मुहैया कराया जाता है।
कहीं कोई सड़क टूट गई है तो उसे भी ठीक करा देते हैं। भारत सरकार, सीमावर्ती राज्यों के साथ मिलकर 'बॉर्डर एक्शन डेवेलपमेंट प्रोग्राम' बनाती है। इसमें बॉर्डर की सुरक्षा कर रहे बल से बाकायदा यह राय ली जाती है कि वहां पर आधारभूत विकास का खाका कैसे खींचा जाए।
बीएसएफ ने बॉर्डर पर रहने वाले लोगों को मोबाइल टॉयलेट तक मुहैया कराए हैं। कोरोना संक्रमण के दौरान गुवाहाटी फ्रंटियर में लोगों के लिए बॉर्डर पर ही मोबाइल एटीएम सुविधा शुरू कराई गई। वहां कोई बीमार होता है तो वे बीएसएफ के पास पहुंच जाते हैं।
ऐसे मामलों में बीएसएफ के डॉक्टर उनका इलाज करते हैं। गंभीर केस है तो उसे निकटवर्ती सिविल अस्पताल तक पहुंचा देते हैं। भारद्वाज के अनुसार, हम उन लोगों की हर तरह से मदद करते हैं। हमारा काम विश्वास और सुरक्षा की भावना पैदा करना है।
साथ ही ये लोग खुफिया जानकारी जुटाने में भी बल की मदद करते हैं। चूंकि इनके खेत सीमा रेखा के दूसरी ओर होते हैं, इसलिए वे दूसरे देश की सीमा में हो रही गतिविधियों की जानकारी दे देते हैं।
कोई संदिग्ध वस्तु, उपकरण या व्यक्ति उन्हें दिखता है, तो वे निकटवर्ती जवान को बता देते हैं। ऐसे में वे हमारे लिए सहयोगी का काम भी करते हैं।
| राज्य | केंद्रीय अंश | राज्य अंश | कुल राशि (करोड़ में) |
| अरुणाचल प्रदेश | 80.87 89.86 | 8.99 | 89.86 |
| असम | 49.50 | 5.50 | 55 |
| बिहार | 32.20 | 21.47 | 53.67 |
| गुजरात | 56.23 | 37.49 | 93.72 |
| हिमाचल प्रदेश | 25.95 | 2.88 | 28.83 |
| जम्मू-कश्मीर | 84.00 | 9.33 | 93.33 |
| मणिपुर | 20.34 | 2.26 | 22.60 |
| मेघालय | 22.69 | 2.52 | 25.21 |
| मिजोरम | 32.20 | 3.58 | 35.78 |
| नागालैंड | 33.96 | 3.77 | 37.73 |
| पंजाब | 33.08 | 22.05 | 55.13 |
| राजस्थान | 81.20 | 54.13 | 135.33 |
| सिक्किम | 27.50 | 3.06 | 30.56 |
| त्रिपुरा | 49.70 | 5.52 | 55.22 |
| उत्तर प्रदेश | 26.60 | 17.73 | 44.33 |
| उत्तराखंड | 29.20 | 3.24 | 32.44 |
| पश्चिम बंगाल | 85.40 | 56.93 | 142.33 |
| कुल | 770.62 | 260.46 | 1031.08 |
| राज्य | गांव | राशि (करोड़ में) |
| हिमाचल प्रदेश | 2 | 6.00 |
| जम्मू-कश्मीर | 24 | 55.50 |
| मणिपुर | 3 | 6.00 |
| मेघालय | 7 | 11.67 |
| नागालैंड | 1 | 2.15 |
| राजस्थान | 3 | 9.00 |
अरुणाचल प्रदेश 18 33.14 करोड़
मणिपुर 3 2.56 करोड़सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को कोरोना से बचाव की जानकारी दी गई। जवानों ने उन्हें सोशल डिस्टेंसिंग और स्वच्छता का मतलब समझाया। उन्हें मास्क, सैनिटाइजर और साबुन मुहैया कराया गया। उन्हें राशन भी दिया गया।
बॉर्डर पर तैनात सुरक्षा बल, कोरोना की लड़ाई में स्थानीय लोगों को साथ लेकर आगे बढ़े। भले ही वहां की अधिकांश आबादी ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं है, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग का पालन उन्होंने ऐसे सीखा, जैसे वे सदियों से ऐसा करते आ रहे हों।
अपने घरों के आसपास, राशन लेते वक्त और खेत-खलिहानों में कुछ काम है तो वे सुरक्षा बलों द्वारा पढ़ाए गए पाठ को याद रखते हैं।
अरुणाचल प्रदेश, लद्दाख, पिथौरागढ़, किन्नौर घाटी, गुवाहाटी, पंजाब, राजस्थान, जोशीमठ और श्रीनगर सहित अनेक ऐसे क्षेत्र हैं, जहां पर ग्रामीणों के साथ मिलकर सुरक्षा बलों ने कोरोना को हराने के लिए एक अभेद दीवार खड़ी कर दी है।