पड़ोसी उत्तर प्रदेश में अबतक 10 विशेष रेलगाड़ियां पहुंच चुकी हैं जबकि पांच और श्रमिक विशेष रेलगाड़ी रास्ते में है एवं 12 श्रमिक विशेष रेलगाड़ियों का परिचालन प्रक्रिया में है।
पश्चिम बंगाल सरकार ने अब तक केवल दो विशेष रेलगाड़ियों को ही मंजूरी दी है जिनमें से एक राजस्थान से और दूसरी केरल से रवाना हुई हैं और अभी रास्ते में हैं।
एक वरिष्ट अधिकारी ने बताया कि एक ओर अन्य राज्य देश के दूसरे हिस्सों से अपने कामगारों को वापस बुला रहे हैं वहीं पश्चिम बंगाल इस प्रक्रिया को बाधित कर रहा है। दो रेलगाड़ी - ठाणे से शालीमार (हावड़ा के नजदीक) और बेंगलुरु से हावड़ा- को आज रवाना होना है लेकिन इन रेलगाड़ियों को जहां से प्रस्थान करना है वहां की सरकारों के दबाव के बावजूद राज्य सरकार ने मंजूरी नहीं दी है।
उन्होंने बताया,राजस्थान की भी अपने प्रवासी कामगारों को स्वीकार करने की गति कम है। केवल तीन रेलगाड़ियां ही अबतक राज्य सरकार ने स्वीकार की है जो इस समय रास्ते में हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, झारखंड ने चार विशेष रेलगाड़ियों को स्वीकार किया जबकि राज्य के श्रमिकों को लेकर आ रही पांच अन्य रेलगाड़ियां रास्ते में है। झारखंड के लिए दो श्रमिक विशेष रेलगाड़ियों को चलाने की प्रक्रिया चल रही है।