कर दरों में बढ़ोतरी पर राज्यों से राय मांगने को लेकर जीएसटी परिषद ने सफाई दी है। इसको लेकर सूत्रों ने रविवार को जानकारी दी। सूत्रों के मुताबिक, जीएसटी दर को बेहतर बनाने के लिए विचार कर रहे मंत्रियों के पैनल को अभी अपनी रिपोर्ट जीएसटी परिषद को सौंपना है, इसके बाद ही जीएसटी परिषद कर की दर को लेकर कोई निर्णय करेगा।
इसके साथ ही सूत्रों ने यह भी बताया कि कर की दरों में बढ़ोतरी के लिए राज्यों से जीएसटी परिषद ने विचार नहीं मांगा है। इसके अलावा आधे से ज्यादा वस्तुओं को 28 प्रतिशत के सबसे ज्यादा जीएसटी स्लैब में स्थानांतरित करने का भी कोई प्रस्ताव नहीं है। गौरतलब है कि बीते साल जीएसटी परिषद ने राज्य मंत्रियों का एक पैनल गठित किया था, जिसका अध्यक्ष कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई को बनाया गया था। राज्य मंत्रियों का ये पैनल कर दरों को युक्तिसंगत बनाकर राजस्व बढ़ाने के तरीकों का सुझाव देगा।
इससे पहले बीते सोमवार को केंद्र सरकार ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज किया था, जिनमें दावा किया जा रहा था कि जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) काउंसिल पांच फीसदी टैक्स स्लैब में आने वाली वस्तुओं को आठ फीसदी के स्लैब में लाने की तैयारी कर रही है। समाचार एजेंसी एएनआई ने सरकारी सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी थी। जीएसटी काउंसिल की बैठक अगले महीने होनी है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि इस बैठक में काउंसिल उस प्रस्ताव पर विचार कर सकती है जिसमें पांच फीसदी टैक्स स्लैब में आने वाली वस्तुओं के तीन और आठ फीसदी के स्लैब में लाने की बात कही गई है।
रविवार को सामने आई रिपोर्ट में कहा गया था कि प्रस्ताव के अनुसार बड़े स्तर पर उपभोग वाली कुछ वस्तुओं को तीन फीसदी के कर स्लैब में रखा जाएगा और बाकी बची वस्तुओं को आठ फीसदी स्लैब के तहत कर दिया जाएगा।
वर्तमान में, जीएसटी में चार टैक्स स्लैब (पांच, 12, 18 और 28 फीसदी हैं। इसके अलावा सोना और सोने के आभूषणों पर तीन फीसदी कर लगता है। काउंसिल में केंद्रीय वित्त मंत्री और राज्यों के वित्त मंत्री शामिल होते हैं।