जल संसाधन एवं गंगा पुनरुद्घार मंत्री उमा भारती ने गंगा को निर्मल और स्वच्छ बनाने की योजना की सफलता पर सांसदों की ओर से जताई जा रही आशंकाओं को खारिज कर दिया है। उन्होंने दावा किया है कि इस पवित्र नदी की पवित्रता हर हाल में जुलाई 2018 तक बहाल कर दी जाएगी।
उन्होंने लोकसभा में कहा कि गंगा को पूरी तरह से निर्मल बनाने और बीते छह दशक में इस नदी की पवित्रता को नष्ट कर दिए जाने के पाप का प्रायश्चित पूरा कर लेने की घोषणा वह इसी सदन में करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि गंगा की निर्मलता का मापदंड लैब टेस्ट से नहीं होगा।
लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान सांसदों ने मोदी सरकार की गंगा को निर्मल और अविरल बनाए संबंधी योजना की सफलता पर आशंका जाहिर की। कई सांसदों ने जानना चाहा कि अब तक इस योजना को कहां तक सफलता हाथ लगी है।
इस पर उमा ने कहा कि गंगा की सफाई के नाम पर हजारों करोड़ रुपये खर्च तो हुए मगर इसकी समस्या को समग्रता में न देखे जाने के कारण स्थिति में बदलाव नहीं आया। उन्होंने कहा कि लाखों साल से बहने वाली गंगा के पानी पवित्र पानी को महज पांच से छह दशक में बर्बाद कर दिया गया।
मोदी सरकार ने गंगा को अविरल और निर्मल बनाने के लिए सभी पक्षों पर काम शुरू किया है। जनता सौ फीसदी जागरूक हो चुकी है। गंगा से सटे कई शहरों के सीवेज प्लान को सुधारा गया है। गंगा की सहायक नदियों की सफाई की योजना भी तैयार की गई है। उमा ने कहा कि किसी को इस योजना की असफलता का भ्रम नहीं होना चाहिए।
गंगा हर हाल में जुलाई 2018 तक निर्मल हो जाएगी। इस दौरान उन्होंने कहा कि गंगा की निर्मलता का पैमाना इसमें प्राचीन काल में अलग-अलग जगहों पर रहने वाले जीव जंतुओं के जीवन से तय होगा। जिन जगहों पर पहले कछुआ, महासिर, स्वर्ण मछली, डॉल्फिन जैसे जीव थे, उन जगहों पर अगर फिर से यही जीव जंतु नजर आए तो मान लिया जाएगा कि गंगा स्वच्छ और निर्मल हो गई है।