औद्योगिक व वित्तीय पुनर्निर्माण बोर्ड (बीआईएफआर) के भंग होने से राज्य में विभिन्न बीमार इकाइयों के तीन लाख से भी ज्यादा कर्मचारियों का भविष्य अधर में लटक गया है। इसकी जगह नए कानून के बारे में कोई जानकारी होने की वजह से अब इन कर्मचारियों को समय पर बकाया वेतन-भत्ता मिलने पर संदेह है। फिलहाल राज्य में बीआईएफआर और इसके अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष 414 मामले लंबित हैं।
सूत्रों के मुताबिक इन लंबित मामलों में 318 निजी इकाइयां और 25 केंद्र सरकार के उपक्रम हैं। इनमें से निजी क्षेत्र की 69 कंपनियों के लिए पुनर्वास योजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है। अगली कड़ी में 150 कंपनियों को बीआईएफआर की प्राथमिकता सूची में रखा गया था। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि दिल्ली दफ्तर 265 मामलों की निगरानी कर रहा है। फिलहाल 117 मामलों में शीघ्र फैसले की पैरवी की जा रही है।