सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि भूमि अधिग्रहण मामले में उसकी पांच सदस्यीय पीठ के फैसले में थोड़ी और स्पष्टता की जरूरत जान पड़ती है। कोर्ट ने कहा, फैसले में भूमि अधिग्रहण और उसके लिए दिए गए मुआवजे को लेकर कुछ भ्रम है।
सीजेआई एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामसुब्रमण्यन की पीठ ने पाया कि इस मामले में कुछ जरूरी सवाल हैं जिन पर चर्चा जरूर होनी चाहिए थी। सीजेआई ने कहा, मेरे मन में भी कुछ सवाल हैं, जिन्हें मैं अपने साथी जजों के साथ साझा करना चाहता हूं।
संविधान पीठ के आदेश में कई भ्रम हैं। उन्होंने कहा, मान लें कि कोई संपत्ति है जिसका सरकार ने कब्जा नहीं लिया और उसके लिए कोई मुआवजा नहीं दिया। ऐसे में अधिग्रहण अमान्य हो जाएगा। लेकिन पांच सदस्यीय पीठ ने फैसले में कहा, अगर सरकार ने कब्जा लिया लेकिन मुआवजा नहीं दिया तो भी अधिग्रहण गलत नहीं होगा।
पीठ ने पूछा कि यहां सवाल है कि कितने वक्त तक सरकार द्वारा मुआवजा नहीं दिए जाने पर अधिग्रहण मान्य रहेगा। पीठ ने कहा, ऐसे कई सवाल हैं जिन पर चर्चा जरूरी है, हम इस मामले पर विचार करेंगे। कोर्ट दो हफ्ते बाद मामले की सुनवाई करेगा।
गौरतलब है कि पांच सदस्यीय पीठ ने इस साल 6 मार्च को फैसले में कहा था कि जिन मामलों में 1 जनवरी 2014 तक कानूनी कार्यवाही पूरी हो चुकी है उन भूमि अधिग्रहण और मुआवजा भुगतान के मामलों को 2013 के कानून के तहत दोबारा शुरू नहीं किया जा सकता।