सीवर लाइन के नालों में सफाई कर्मचारियों की नहीं, इस देश के संविधान की आत्मा मर रही है। ऐसा तब हो रहा है कि जब सरकार ने इसे अवैध घोषित कर रखा है। इसे सिर्फ सरकार पर दोष देकर खत्म नहीं किया जा सकता। इसे खत्म करने के लिए इस समाज को भी अपनी भूमिका निभानी होगी। यह कहना है योगेंद्र यादव का।
सीवर की सफाई करते समय हो रही मौतों के खिलाफ मंगलवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन में बोलते हुए योगेंद्र यादव ने कहा कि इस व्यवस्था का आलम यह है कि इसके पास पर्याप्त मात्रा में धन रखा हुआ है, मशीनें खरीदी जा सकती हैं, लेकिन कोई इच्छाशक्ति नहीं दिखा रहा है जिसकी वजह से सफाई कर्मचारियों की लगातार मौतें हो रही हैं।
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए विल्सन ने कहा कि यह कार्य इस समाज ने अपनी इच्छा से नहीं अपनाया है। इसे एक व्यवस्था के तहत इनके ऊपर थोप दिया है लेकिन अब यह समाज इस अपमान को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। खुद समाज को भी आगे बढ़कर इसका बहिष्कार करना होगा।
हाल ही में दिल्ली में सीवर लाइन की सफाई करते हुए लगभग 6 कर्मचारियों की मौत हो गई थी। इन कर्मचारियों के परिवार के लोगों ने बताया कि अब उनके परिवार में कमाने वाला कोई नहीं रह गया है। उनका आगे का जीवन अंधकार में बीतने वाला है। इसके बावजूद दुर्भाग्य है कि आगे की जिंदगी जीने के लिए उनके लिए रोजगार का कोई दूसरा साधन नहीं है। उन्हें इस बात का डर है कि कहीं बाद में उनके बच्चों को भी इसी पेशे को न अपनाना पड़े।
ऐसे ही पीड़ित परिवार की एक बेटी शिवांगी ने बताया कि वह अपने पिता की तरह सीवर लाइन की सफाई करते हुए नहीं मरना चाहती। वह पढ़ना चाहती है और आगे की जिंदगी में पढ़ाई करके डॉक्टर बनना चाहती है लेकिन पैसे की कमी से उसकी मां अब उसे पढ़ा नहीं पा रही है। शिवांगी का कहना है कि सरकार सिर्फ उसके लिए नहीं, बल्कि उसके जैसे सभी बच्चों को पढ़ने का अवसर दे जिससे उन्हें कोई गन्दा काम न करना पड़े।