सरोगेसी (किराये की कोख) के जरिये माता-पिता बनने वाले जोड़ों को सेरोगेट मां का तीन वर्ष का स्वास्थ्य बीमा कराना होगा। स्वास्थ्य बीमा की रकम गर्भावास्था, प्रसव और प्रसव के बाद पैदा होने वाली मुश्किलों के इलाज के लिए पर्याप्त होनी चाहिए। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से 21 जून को भारत के राजपत्र में प्रकाशित सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के मुताबिक सरोगट मां सेरोगेसी प्रक्रिया से तीन से ज्यादा बार नहीं गुजर सकती।
एक बार में तीन से अधिक भ्रूण कोख में नहीं रखे जा सकते। देश में जनवरी 2022 से लागू कानून के नियमों के मुताबिक गर्भ के चिकित्सकीय समापन (एमटीपी) अधिनियम, 1971 के प्रावधानों के तहत सरोगेट मां को गर्भपात का अधिकार होगा। मंत्रालय की तरफ से प्रकाशित गजट सूचना के नियमों के मुताबिक सरोगेसी क्लीनिक में एक स्त्री रोग विशेषज्ञ, एक एंड्रोलॉजिस्ट, एक भ्रूण विज्ञानी, मनोवैज्ञानिक, एनेस्थेटिस्ट व एक निदेशक होना जरूरी है।
इन परिस्थितियों में सरोगेसी की इजाजत नियमों के मुताबिक किसी महिला को सेरोगेसी की इजाजत तभी मिलेगी, जब महिला के शरीर में जन्मजात गर्भाशय मौजूद नहीं हो, विकृतियों वाला हो। कैंसर की वजह से निकाल दिया गया हो। इन विट्रो फर्टिलाइजेशन व इंट्रासाटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन के कई प्रयासों के बाद भी गर्भधारण नहीं हो पा रहा हो या मां बनने पर जान का खतरा हो। आपको बता दें कि देश में सरोगेसी (रेग्युलेशन) एक्ट 2021 इसी साल के 25 जनवरी से प्रभावी हुआ है।