बुलंदशहर रेप कांड की जांच में पुलिस की लीपापोती से क्षुब्ध हाईकोर्ट ने जांच सीबीआई को सौंप दी है। एनएच-91 पर हुई अन्य चार घटनाओं की कोर्ट मॉनिटरिंग करती रहेगी। इसके लिए 17 अगस्त की तिथि नियत की गई है।
इस दिन अन्य घटनाओं से संबंधित दस्तावेज, रिकार्ड और जांच की प्रगति उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। प्रदेश सरकार की ओर से अदालत को प्रगति की जानकारी देने और समय की मांग को नकारते हुए मुख्य न्यायमूर्ति दिलीप बी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने साफ किया कि वह पहले ही सरकार को काफी समय दे चुके हैं।
रेप जैसे गंभीर और संवेदनशील मामले की जांच में और ज्यादा देर नहीं की जा सकती है। घटना पर स्वत: संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने आठ अगस्त से इस मामले की सुनवाई प्रारंभ की।
लगातार चार दिनों तक सुनवाई के बाद बुलंदशहर पुलिस इस मामले से जुड़े अहम दस्तावेज पीड़ितों का बयान, मेडिकल रिपोर्ट, प्राथमिकी आदि उपलब्ध नहीं करा सकी।
इससे नाराज पीठ ने कहा कि हमें इस मामले को लेकर सरकार की नीयत पर संदेह है। चार तारीखों पर सरकार की ओर से एक भी स्टेटमेंट या रिकार्ड नहीं दिया जा सका है और जो रिकार्ड दिए गए हैं उनमें कुछ भी नहीं है।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान एनएच 91 पर सात मई, 12 मई, 10 जुलाई, 30 जुलाई और नौ अगस्त की घटनाओं का संज्ञान लिया। पूछा कि क्या इन घटनाओं की प्राथमिकी तत्काल दर्ज कर ली गई थी। जांच की प्रगति क्या है। कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया।
लूट की घटना चोरी में हुई दर्ज
अपर महाधिवक्ता इमरान उल्लाह ने कोर्ट को बताया कि सात मई को लूट की वारदात हुई थी जबकि प्राथमिकी से पता चला कि घटना चोरी की धाराओं में दर्ज की गई है।
इसी प्रकार से नौ जुलाई को चलती वैन से खींचकर रेप करने की घटना में प्राथमिकी मारपीट की धाराओें में दर्ज हुई। कोर्ट को यह भी बताया कि 10 जुलाई की घटना में प्राथमिकी एक दिन पूर्व 11 अगस्त को दर्ज कर ली गई है।
सात मई, 10 जुलाई और 30 जुलाई की घटनाओं में ‘मोडस ऑपरेंडी’ (अपराध करने का तरीका) एक जैसा रहा है हालांकि रेप सिर्फ 30 जुलाई की घटना में हुआ था।