भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे तनावपूर्ण माहौल के बीच सरकार और विपक्ष दोनों ही चुनावी मोर्चे पर बहुत संभल कर चल रहे हैं। दोनों पक्ष इस समय में सेना के साथ मजबूती के साथ खड़े दिखना चाहते हैं तो वहीं अपने किसी भी कार्यक्रम या बयान को चुनाव से दूर दिखाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। देश के साथ खड़ा दिखने के लिए जहां कांग्रेस ने अपना अहमदाबाद का कार्यक्रम स्थगित कर दिया तो वहीं आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपना अनशन का कार्यक्रम टाल दिया। इस तरह राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे पर संवेदनशीलता दिखाई और इस अवसर पर केंद्र सरकार के साथ खड़े दिखने की कोशिश की।
हालांकि, विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार के रवैये से नाराज भी हैं। पीओके के क्षेत्र में बने आतंकी ठिकानों पर वायुसेना के हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह चूरू की रैली में सभा को संबोधित किया, वह विपक्ष को नागवार गुजरा है। यही कारण है कि बुधवार को 21 विपक्षी दलों की बैठक के बाद विपक्ष ने साफ कर दिया कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी भी जाहिर की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन हमलों के बाद विपक्ष को भरोसे में नहीं लिया।
हालांकि, भाजपा ने विपक्षी दलों की इस चिंता को बेवजह करार दिया है। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव सरदार रविंदर पाल सिंह ने कहा कि हमलों के बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सर्वदलीय बैठक बुलाकर स्थिति की जानकारी दी थी। इसलिए इस तरह के आरोप का कोई अर्थ नहीं है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से इस मुद्दे पर एक साथ खड़े होकर देश की एकता दिखाने की अपील की।