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8thCPC: 'सीआरपीएफ' ने आर्थिक हितों की पैरवी करने के लिए बनाया बोर्ड, आठवें वेतन आयोग तक पहुंचाएगा सुझाव

सार

केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों के वेतन/भत्तों और दूसरे तरह के आर्थिक फायदों में बदलाव के लिए आठवें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन किया है। गत वर्ष तीन नवंबर को जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित यह आयोग 18 महीने में अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को देगा। 
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8th pay Commission - फोटो : Amar Ujala
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केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों के वेतन/भत्तों और दूसरे तरह के आर्थिक फायदों में बदलाव के लिए आठवें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन किया है। गत वर्ष तीन नवंबर को जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित यह आयोग 18 महीने में अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को देगा। हालांकि आयोग के 'टर्म ऑफ रेफरेंस' में अपनी मांगों को शामिल कराने के लिए विभिन्न कर्मचारी संगठनों एवं नेशनल काउंसिल (स्टाफ साइड) की ज्वाइंट कन्सलटेटिव मशीनरी फॉर सेंटर गवर्नमेंट एम्पलाइज 'जेसीएम' ने अपने सुझाव दे दिए थे। देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' ने अब अपने जवानों/अफसरों के आर्थिक हितों की पैरवी करने के लिए सात सदस्यीय बोर्ड का गठन किया है। यह बोर्ड, केंद्रीय गृह मंत्रालय के माध्यम से अपने सुझाव आठवें वेतन आयोग तक पहुंचाएगा। 
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सीआरपीएफ ने दो जनवरी को एडीजी (हेडक्वार्टर) संदीप खिरवार की अध्यक्षता में एक विशेष बोर्ड गठित किया है। बोर्ड में मितेश जैन आईजी (पर्स), किशोर प्रसाद डीआईजी रेंज नई दिल्ली, रमेश कुमार ग्रुप सेंटर जमशेदपुर, पदम कुमार डीआईजी रेंज, बंगलुरु, वाईएन राय कमांडेंट 128 बटालियन, अभिषेक सिंह डीएफए महानिदेशालय और संदीप सिंह पंवार टूआईसी को बोर्ड का सदस्य बनाया गया है। इनके अलावा सहायक कमांडेंट (मिनिस्ट्रियल), इंस्पेक्टर (मिनिस्ट्रियल), इंस्पेक्टर स्टैनो, उप निरीक्षक मिनिस्ट्रियल, हवलदार जीडी व दो सिपाही रनर ड्यूटी, को भी बोर्ड में शामिल किया गया है। 



एक अधिकारी के मुताबिक, सीआरपीएफ देश का एक ऐसा अर्धसैनिक बल है जो आंतरिक ड्यूटी के मोर्चे पर सबसे ज्यादा संख्या में तैनात है। जेएंडके में आतंकवाद हो या उत्तर पूर्व में उग्रवाद, इन जोखिम भरे क्षेत्रों में यह बल अपनी अहम भूमिका निभा रहा है। सबसे बड़े जोखिम वाली ड्यूटी नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रहती है। 31 मार्च 2026 तक देश नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा, इसमें सबसे बड़ा योगदान सीआरपीएफ और इसकी विशेष इकाई 'कोबरा' का है। ऐसे में इस बल को आठवां वेतन आयोग, खास तव्वजो दे, इसके लिए बोर्ड का गठन किया गया है। वेतन आयोग को जो रिपोर्ट सौंपी जाएगी, उसमें सीआरपीएफ की तैनाती वाले जोखिम भरे क्षेत्रों के बारे में बताया जाएगा। वहां पर जवानों को किन दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, उन क्षेत्रों तक जाने के लिए कैसा ट्रांसपोर्ट है, सड़कें एवं दूसरी मूलभूत सुविधाओं की क्या स्थिति है। 
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मौजूदा समय में सीआरपीएफ जवानों के लिए वेतन एवं भत्तों का ढांचा, जोखिम भत्ते, एचआरए, हेल्थ सेवाएं और दूसरी दिक्कतों का उल्लेख, बोर्ड की रिपोर्ट में रहेगा। वेतन भत्ते और अन्य वित्तीय फायदों को किस तरह से बेहतर बनाया जा सकता है, उनमें सुधार के लिए जरुरी सुझाव बोर्ड द्वारा दिए जाएंगे। खासतौर से जम्मू कश्मीर, नक्सल और उत्तर पूर्व में जवानों एवं अफसरों को किन दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, उनका उल्लेख भी किया जाएगा। सीआरपीएफ में लंबे समय से कैडर रिव्यू नहीं हो पा रहा है, इसके चलते अफसर और जवान, पदोन्नति के मोर्चे पर पिछड़ गए हैं। 

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'संगठित समूह ए सेवा' (ओजीएएस) और 'नॉन-फंक्शनल वित्तीय उन्नयन' (एनएफएफयू) जैसे मुद्दे, अदालतों में लंबित हैं। इन बातों के मद्देनजर भी जरुरी सुझाव, बोर्ड द्वारा आठवें वेतन आयोग को दिए जाएंगे। सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर तक के कार्मिकों को भी पदोन्नति के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। ये बातें भी वेतन आयोग तक पहुंचेगी। 
वित्त मंत्रालय के 2008 में जारी एक कार्यालय ज्ञापन 'ओएम' में कहा गया था कि जिन कर्मियों का 48 सौ रुपये का 'ग्रेड पे' है और वे उसमें चार साल की सेवा कर चुके हैं तो उनका 'ग्रेड पे' 54 सौ रुपये हो जाएगा। यह बात केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में स्वत: ही लागू नहीं होती। इसे लागू कराने के लिए इंस्पेक्टरों को अदालतों का सहारा लेना पड़ता है। इस तरह के मुद्दे भी बोर्ड की सिफारिशों में शामिल किए जा सकते हैं।
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