महाराष्ट्र के ठाणे जिले में खाद्य सामग्री बनाने वाली इकाइयों के दो मालिकों के खिलाफ मजदूरों को बंधक बनाने, उनसे हर दिन घंटों अतिरिक्त काम कराने और पर्याप्त भोजन एवं वेतन न देने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।
महाराष्ट्र के ठाणे जिले के अंबरनाथ पश्चिम से उत्तर प्रदेश के 10 मजूदरों को मुक्त कराया गया है। इन सभी से यहां खाद्य सामग्री बनाने वाली एक इकाई में अमानवीय परिस्थितियों में काम करवाया जा रहा था। इस सिलसिले में पुलिस ने दो ठेकेदारों को गिरफ्तार किया है। इन दोनों के खिलाफ मजदूरों को बंधक बनाने, उनसे हर दिन घंटों अतिरिक्त काम कराने और पर्याप्त भोजन एवं वेतन न देने के आरोप में केस दर्ज किया गया है।
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मजदूरों ने सुनाई जुर्म की दास्तान
अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि ठाणे जिले के अंबरनाथ पश्चिम में बंधुआ मजदूरी रैकेट से उत्तर प्रदेश के 10 लोगों को बचाया गया है। इन मजदूरों को अच्छी सैलरी का वादा किया गया था लेकिन वे एक अमानवीय परिस्थितियों में काम करते पाए गए। उन्होंने बताया कि शोषण का यह मामला तब सामने आया जब कमलेश फुन्नन बनवासी नामक एक मजदूर 17 दिसंबर को वहां से भागने में कामयाब रहा और उसने ठाणे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) से संपर्क किया। इसके बाद डीएलएसए के सचिव रविंद्र पाजंकर ने कलेक्टर श्रीकृष्ण पांचाल को अलर्ट किया।
एक बयान में कहा गया कि इसके बाद रेवेन्यू, पुलिस और श्रम विभाग के कर्मचारियों की एक टीम बनाई गई और फैक्टरी में छापा मारा गया। इस दौरान भदोही और जौनपुर जिला निवासी सिंटू विनोद बनवासी (18), चंदू हरि बनवासी (40), संजय डॉक्टर बनवासी (22), कल्लू बनवासी, सूरज बनवासी, संजय खिलारी बनवासी (19), सुरेश बनवासी, सुकुद विजय, सुखी पन्ना और विजय कुमार श्रीराम (34) को बचाया गया।
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पुलिस ने बताया कि इन लोगों को ठेकेदार निक्की उर्फ कृष्ण कुमार अग्रहरि और नितिन तिवारी ने 18000-20000 रुपये महीने की सैलरी का वादा करके काम पर रखा था। हालांकि, उन्हें हर रात एक छोटे से कमरे में बाहर से बंद करके रखा जाता था। परिवारों से संपर्क रोकने के लिए उनके फोन छीन लिए गए थे। उन्हें रोजाना पीटा भी जाता था।