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दिल्ली के दिल कनॉट प्लेस में ठक-ठक गैंग से रहें बच कर, गिरे रुपये उठाने का लालच पड़ सकता है भारी!

Sat, 07 Dec 2019 04:12 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Delhi Police Thak Thak Gang - फोटो : Social Media
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दिल्ली का दिल कनॉट प्लेस, जिसे इलिट क्लास की मार्केट भी कहा जाता है। वहां स्थित सेंट्रल पार्क की रौनक आपका मन मोह लेती है। दशकों बाद भी पालिका बाजार आज भी ग्राहकों को अपनी तरफ आकर्षित करता है। वहीं यहां अपराध की दुनिया भी उतनी ही निराली है। कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन के एसएचओ विनोद नारंग और उनकी टीम की तमाम चौकसी के बाद भी अपराधी पुलिस को नाकों चने चबवाने से नहीं चूकते।
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वहीं आजकल ठक-ठक गिरोह ने कनॉट प्लेस में अपना डेरा डाल लिया है। शुक्रवार को दोपहर 3.56 मिनट पर अनुराग अग्रवाल का ड्राइवर इसी ठक-ठक गिरोह के झांसे में आ गया और ठक-ठक गिरोह नकदी, दस्तावेज, लैपटॉप से भरा बैग पलक झपकते ही ले उड़ा।

क्या है ठक-ठक गिरोह

यह कार, एसयूवी को अपना निशाना बनाता है। इसे चार-पांच लोग मिलकर अंजाम देते हैं। आमतौर पर ठक-ठक गिरोह के निशाने पर कार, एसयूवी जैसी गाडिय़ां रहती हैं। एक युवक गाड़ी की रेकी करता है। गाड़ी बैग, मोबाइल या लैपटॉप आदि जैसा सामान होने की जानकारी देता है। दूसरा युवक सामान उठाने के लिए सही जगह पर पहले ही आ जाता है। जबकि एक तीसरा युवक कुछ दूर पर खड़ा रहता है। उसका काम दूसरे युवक से मिले बैग को लेकर सुरक्षित स्थान पर भागना है। अब चौथा युवक यानी ठक-ठक एक बार गाड़ी के पास सावधानी से गुजरता है और ड्राइवर सीट के पास रुपए बिखेर देता है।

रुपये गिराने के बाद वह ड्राइवर को ठक-ठक (नॉक) करके कुछ गिरे होने की जानकारी देता है। ड्राइवर लालच में आकर रुपये एकत्र करने लगता है और सामान ले जाने के लिए खड़ा युवक जरा भी देर नहीं लगाता और बैग आदि लेकर रफू-चक्कर हो जाता है।

पुलिस के पकड़ते ही तैयार खड़े रहते हैं वकील

कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन के अधिकारियों के मुताबिक यह गैंग काफी बड़ा है। गैंग का संचालन कहीं और से होता है। इस गैंग के लोग कभी पकड़े भी गए, तो बचाने के लिए वकील तैयार खड़े रहते हैं। बताते हैं इसका इंतजाम गैंग का सरगना करता है। जैसे ही गिरोह के सदस्य पुलिस की गिरफ्त में आते हैं, वकील जमानत लेने से लेकर मुकदमा लड़ने से बचाने की हर संभव कोशिश करते हैं। जिसके चलते ठक-ठक गिरोह की पौ बारह रहती है। बताते हैं आए दिन ठक-ठक गैंग इस तरह से लोगों को अपना शिकार बनाता रहता है।

कहां से आता है ठक-ठक गिरोह

ठक-ठक गैंग के कुछ पकड़े गए युवकों का संबंध तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली से है। वहां रामनगर नाम के मुहल्ले के युवक बड़ी संख्या में इस वारदात को अंजाम देने के लिए दिल्ली समेत अन्य शहरों में जाते हैं। बताते हैं इनकी खासियत है कि एक बड़ा शिकार पकड़ते ही ये किसी नई दिल्ली या पुरानी दिल्ली से जाने वाली रेलगाड़ी पर सवार हो जाते हैं। इसके बाद इनका रास्ता सीधा तिरुचिरापल्ली की तरफ होता है।

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इसके चलते ऐसे मामलों की पड़ताल काफी जटिल हो जाती है। एसएचओ विनोद नारंग बताते हैं कि पिछले कुछ समय से लगातार दबाव बनाने, पुलिस के तिरुचिरापल्ली तक जाकर आरोपियों को पकड़कर लाने के बाद ठक-ठक गिरोह कनॉट प्लेस में नहीं दिखाई पड़ रहा था, लेकिन अब इधर फिर इसके सक्रिय होने की सूचना है।

बरतिए सावधानी

ठक-ठक गिरोह से बचना है, तो सावधानी बरतिए और लालच पर काबू रखिए। कनॉट प्लेस या इस तरह के बाजार में गाड़ी का शीशा बंद कर और लॉक करना न भूलें। गाड़ी को खुला छोड़ते ही ठक-ठक गिरोह अपना काम कर जाएगा। इतना ही नहीं यदि कोई शख्स आपके पास आए और कुछ गिरे होने की बात कहे, तो उसकी बातों में न आएं। यदि गाड़ी के पास कोई सामान गिरे होने, पैसे गिरे होने जैसी सूचना दे, तो उस पर आप यकीन न करें। क्योंकि जरा सा लालच आपका बड़ा नुकसान करवा सकता है।

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