अमेरिका सहित पूरी दुनिया के लिए 2 मई, 2011 एक ऐतिहासिक दिन था। दुनिया में आतंक फैलाने वाले ओसामा बिन लादेन का इसी दिन अंत हुआ था। अलकायदा के सरगना ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान के एबटाबाद में अमेरिकी नौसेना ने मारा गिराया था। रिपोर्ट के मुताबिक टीम को लादेन को खोजने और उसे मारने में महज नौ मिनट का समय लगा।
वहीं इस ऑपरेशन को पूरा होने में 40 मिनट का वक्त लगा। लादेन का अंत ऑपरेशन नेपच्यून स्पीयर के तहत किया गया था। अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने इस पूरे मिशन को कुछ इस तरह अंजाम दिया, जिससे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई को भनक तक नहीं पड़ी।
जानकारी के मुताबिक ओसामा का पता लगाने में कई सालों का वक्त लगा था। साल 2007 में सीआईए के अधिकारियों ने ओसामा का पता लगाया। ओसामा से जुड़े एक व्यक्ति का पीछा करते हुए अमेरिका के जासूस पाकिस्तान के एबटाबाद जा पहुंचे। वहां पहुंचकर उन्हें पता चला कि जिस घर में ओसामा रहता है, वहां सुरक्षा का कड़ा बंदोबस्त था। ओसामा का पता लगाने के लिए सीआईए ने फिर डॉक्टर शकील अफरीदी की मदद ली।
डॉक्टर शकील ने टीकाकरण की एक मुहिम चलाई और डीएनए सैंपल के नमूने एकत्रित किए। इसी दौरान लादेन के घर भी कुछ नर्सों को भेजा गया। जिससे इस बात की पुष्टि हुई कि उस घर में लादेन ही रहता है। लादेन का पता लगने के बाद उसे मारने की योजना पर काम शुरू हुआ।
लादेन के खात्मे के लिए सील टीम के सदस्यों को प्रशिक्षण दिया गया। सील वे कमांडो होते हैं जो समुद्र, हवा और जमीन, तीनों जगह कारगर ढंग से अपने मिशन को अंजाम दे सकते हैं। इस ऑपरेशन को 29 अप्रैल, 2011 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मंजूरी दी। जिसके बाद सील टीम के सदस्य लादेन का खात्मा कर अपने मिशन में सफल हुए।