दूरबीन से पीओके का जायजा लेते दिखे बिपिन रावत
- फोटो : ani
केंद्र सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ भले ही जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है, लेकिन इसके बावजूद घाटी में आतंकियों का पूर्ण सफाया नहीं हो पा रहा है। साल दर साल आतंकवादी घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। आतंकियों द्वारा मारे गए आम नागरिकों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। 2016 के दौरान जम्मू कश्मीर में 322 आतंकवादी घटनाएं हुई थी, वहीं इस साल अभी तक 586 घटनाएं हो चुकी हैं। गृह मंत्रालय में राज्यमंत्री जी कृष्ण रेड्डी का कहना है कि सुरक्षा बल आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए प्रभावी तथा सतत कार्रवाई कर रहे हैं। इसी का नतीजा है कि पिछले कुछ वर्षों में जम्मू कश्मीर के विभिन्न इलाकों में काफी अधिक संख्या में आतंकवादी मार गिराए गए हैं।
वर्ष आतंकी घटनाएं मारे गए आम नागरिक घायल नागरिक
2016 322 15 66
2017 342 40 99
2018 614 39 63
2019 586 36 183
(10 नवंबर तक)
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, जम्मू-कश्मीर में स्थिति सामान्य है
केंद्रीय गृहमंत्री ने बुधवार को राज्यसभा में कहा, कश्मीर में हालात बिल्कुल सामान्य हैं। कश्मीर में जनजीवन पूरी तरह पटरी पर है। वहां सभी स्कूल, अस्पताल व अदालत से लेकर सारे सरकारी दफ्तर सुचारू रूप से काम कर रहे हैं। इसी सदन में कहा गया था कि विशेष राज्य का दर्जा छिनने के बाद जम्मू-कश्मीर में खून की नदियां बहेंगी, लेकिन 5 अगस्त के बाद से लेकर अब तक वहां पुलिस फायरिंग में वहां एक भी नागरिक की जान नहीं गई है। पाँच अगस्त के बाद पत्थरबाजी की घटनाओं में काफी कमी आई है। पिछले साल इसी अवधि तक 802 पत्थरबाजी की घटनाएं हुई थी, लेकिन इस साल अब तक 544 घटनाएं हुई हैं। सभी 93,247 लैंडलाइन कनेक्शन चालू हो चुके हैं।
इनके अलावा 59 लाख मोबाइल फोन भी चालू हालत में हैं। जहां तक बात इंटरनेट सर्विस की है तो वक्त आने पर यह भी बहाल हो जाएगी। फिलहाल आवश्यक कार्यों के लिए 10 जिलों में टर्मिनल्स काम कर रहे हैं। श्रीनगर शहर के अस्पतालों की ओपीडी में सितंबर महीने में 7 लाख 67 हजार, जबकि अक्टूबर महीने में 7 लाख 91 हजार मरीजों का इलाज हुआ है।
शाह ने कहा, 1995-96 में देश में मोबाइल फोन आया, लेकिन कश्मीर में इसकी शुरुआत 2003 में ही हो सकी। आज सिर्फ सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वहां इंटरनेट बंद है। स्थानीय प्रशासन की ओर से जब भी स्थिति अनुकूल होगी, इंटरनेट सुविधा फिर से बहाल कर दी जाएगी। कश्मीर में सीआरपीसी की धारा 144 के तहत लगाए गए सारे प्रतिबंध सभी 195 थाना क्षेत्रों से हटाए जा चुके हैं।