Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट आतंकवाद वित्त पोषण मामले में शब्बीर अहमद शाह की जमानत याचिका पर सात जनवरी को सुनवाई करेगा। एनआईए ने मामले को स्थगित करने की मांग की थी, लेकिन बेंच ने स्पष्ट किया कि आगे कोई मौका नहीं दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि वह आतंकवाद वित्त पोषण मामले में कश्मीरी अलगाववादी शब्बीर अहमद शाह की जमानत याचिका पर सात जनवरी को सुनवाई करेगा। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने यह आदेश उस समय दिया, जब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से पेश वकील ने मामले को स्थगित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता उनकी ओर से बहस करेंगे।
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इसके बाद बेंच ने मामले को सात जनवरी के लिए तय किया और कहा कि एनआईए को आगे मामले की सुनवाई टालने की अनुमति नहीं दी जाएगी। शब्बीर शाह ने दिल्ली हाईकोर्ट के 12 जून के आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें इस मामले में जमानत नहीं दी गई थी।
आज सुनवाई के दौरान एनआईए की ओर से पेश वकील ने कहा, सॉलिसिटर जनरल हमारे पक्ष में बहस कर रहे हैं। वह कोर्ट-7 में जारी सुनवाई में व्यस्त हैं। कृपया इस मामले को जनवरी में (सुनवाई के लिए) रखें। एनआईए की ओर से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा पेश हुए। उन्होंने कहा कि सॉलिसिटर जनरल मामले की बहस करेंगे।
शाह की ओर से वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंसाल्विस ने कहा कि मामला अगले हफ्ते सूचीबद्ध हो सकता है। इसके बाद बेंच ने एनआईए के वकील से पूछा- जनवरी क्यों? वह जमानत मांग रहे हैं। मामला सितंबर से लंबित है। नोटिर चार सितंबर को जारी किया गया था। तीन महीने बीत चुके हैं। वकील ने कहा कि तुषार मेहता एनआईए की ओर से बहस करेंगे। फिर बेंच ने मामले की सुनवाई की स्थिति के बारे में पूछा।
एनआईए के वकील लूथरा ने कहा कि गवाहों से पूछताछ चल रही है और अब तक लगभग 30 गवाहों की पूछताछ हो चुकी है। उन्होंने कहा कि 95 गवाह हटा दिए गए हैं और एनआईए संख्या को और कम कर सकता है। गोंसाल्विस ने कहा कि अब कुल 248 गवाह हैं, जिनमें से केवल 30 से पूछताछ हुई है। इसके बाद बेंच ने कहा, प्रतिवादी (एनआईए) को अंतिम मौका दिया जाता है। हम इसे सात जनवरी को सुनेंगे। आगे कोई समय नहीं दिया जाएगा।