देश में आईएसआई के लिए काम करने वाले देशद्रोहियों की ओर से दी जाने वाली छोटी से छोटी जानकारी का इस्तेमाल पाकिस्तान काफी घातक तरीकेसे करता है। संसद भवन, लाल किला से लेकर सेना के कैंपों में आतंकियों के हुए अबतक के बड़े हमलों में भवन और रास्ते संबंधी इन्हीं छोटी जानकारियों का इस्तेमाल हुआ। 2016 में उड़ी सेना कैंप हमला इसका हाल का ज्वलंत उदाहरण है। पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई इन जानकारियों के दम पर ही आतंकी हमले भी करवाता है।
नागपुर में ब्रह्मोस मिसाइल यूनिट के सिस्टम इंजीनियर की गिरफ्तारी के सिलसिले में खुफिया विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सवाल छोटी या बड़ी जानकारी का नहीं होना चाहिए। दुश्मन के लिए छोटी से छोटी जानकारी भी हमारे लिए घातक साबित होती है। उड़ी से सैनिक रेजिमेंट कैंप पर हमला करने वाले जैश-ए-मोहम्मद के चार आतंकियों के अच्छी तरह मालूम था कि खास दिन कैंप के गार्ड बदलने वाले हैं। उस रोज कैंप की सुरक्षा में लगे 10 डोगरा रेजिमेंट की जगह 6 बिहार रेजिमेंट की तैनाती होती थी।
गार्ड की ऐसी तैनाती के दौरान करीब एक से दो दिन तक स्वाभावित रुप से सुरक्षा व्यवस्था थोड़ी कमजोर हो जाती है। बिहार रेजिमेंट के जवान टेंट में सो रहे थे जब आतंकियों ने तीन मीनट के भीतर 15 ग्रेनेड से हमले कर 19 जवानों की जान ले ली। इतना ही नहीं आतंकियों के यह भी मालूम था कि उस रोज सुबह सुबह कैंप में डीजल का टैंकर आने वाला है जिससे कनस्तरों में भरा जाएगा। आतंकियों ने वहां भी हमले कर आग से दहशत फैला दिया था।
खुफिया विभागे वरिष्ठ सूत्रों के मुताबिक देश में अबतक 2000 से भी अधिक लोग आईएसआई के लिए जासूसी करने के मामले में गिरफ्तार किए गए हैं। इनमें सेना, अर्धसैनिक बल, खुफिया विभाक समेत आम लोग भी शामिल हैं। करीब इतने ही अभी यह काम कर भी रहे होंगे जो एजेंसियों के रडार में नहीं आए हैं। यह ऐसे लोग हैं जो खास डिमांड पर पैसे के एवज में सैन्य और संवेदनशील ठिकानोअं के फोटो, उसके रास्ते, बस स्टैंड, पुलिस स्टेशन या अस्पताल जैसी छोटी दिखने वाली जानकारियां देते हैं। लेकिन यह दुश्मन के लिए काफी अहम साबित होता है।
अधिकारी ने बताया कि इसी साल छह लोग ऐसे मामलों में पकड़े गए हैं। मिलिट्री इंटेलिजेंस ने मई में उत्तराखंड केपिथौड़ागढ़ से रमेश नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। रमेश 2015 में पाकिस्तान में भारतीय उच्चायोग के एक अधिकारी के यहां बाबर्ची काम करता था। उसने उस अधिकारी केगैर मौजूदगी में उनकेघर पर आईएसआई के गुर्गो में चार बार घुसने में मदद की थी। इसी तरह अप्रैल में अमृतसर के रवि कुमार की गिरफ्तारी हुई।
उसने पंजाब के कई सैन्य ठिकानों और प्रतिबंधित इलाकों के फोटो और रास्ते का हाथ सले बनाया हुआ नक्शा आईएसआई को बेचा था। मई में दिल्ली हाईकोर्ट ने माधुरी गुप्ता नाम की एक राजनयिक को तीन साल जेल की सजा सुनाई थी। माधुरी ने पाक स्थित भारतीय उच्चायोग में अपने कार्यकाल का दौरान आईएसआई को कुछ संवेदनशील जानकारियां दी थीं।