PFI का प्रतिबंधित संगठन सिमी से भी नाता रहा है। यह सिमी की बी टीम है। स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेट ऑफ इंडिया (SIMI) का गठन 1977 में हुआ था। इसे 2006 में प्रतिबंधित कर दिया गया था। इसके एक साल बाद पीएफआई का उदय हुआ। इसका नाम 2019 की लखनऊ हिंसा और हाथरस कांड से भी जुड़ा था। यूपी में हिंसा की कई घटनाओं में यह लिप्त रहा। लखनऊ हिंसा में गिरफ्तार आरोपियों में से 3 पीएफआई के हैं। शामली में भी चार अन्य लोगों को गिरफ्तार किया था। हाथरस में दलित युवती से दुष्कर्म के बाद सौहार्द बिगाड़ने के आरोप में इसका एक कार्यकर्ता गिरफ्तार हुआ था।
कर्नाटक के हिजाब विवाद के दौरान भी पीएफआई का नाम सामने आया था। मुस्लिम छात्राओं को स्कूलों में हिजाब पहनकर जाने व ड्रेस कोड नहीं मानने के लिए उकसाने के लिए भी इसे जिम्मेदार बताया गया था। दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके में हालिया हिंसा में भी इस संगठन का नाम सामने आया था। हाल ही में केरल में एक रैली के दौरान इसके मंच से एक बच्चे ने हिंदुओं व ईसाईयों के खिलाफ नारेबाजी की थी। इस मामले में संगठन के दो पदाधिकारियों समेत तीन पर एफआईआर दर्ज की गई है।
राज्यपाल टीएन रवि, असम के सीएम व यूपी के डिप्टी सीएम कर चुके पाबंदी की मांग
असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्व सरमा व यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या समेत कई नेता पीएफआई पर पाबंदी की मांग कर चुके हैं। अभी गृह मंत्रालय ने इस पर कोई फैसला नहीं किया है। इसी माह तमिलनाडु के राज्यपाल टीएन रवि ने भी इस पर पाबंदी की मांग की है।
इसी माह ईडी ने पीएफआई के दो गिरफ्तार नेताओं अब्दुल रजाक पीडियाक्कल उर्फ अब्दुल रजाक बीपी और अशरफ खादिर उर्फ अशरफ एमके के खिलाफ लखनऊ की विशेष पीएमएलए अदालत में एक पूरक आरोप पत्र दाखिल किया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि संयुक्त अरब अमीरात की एक होटल ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के लिए मनी लॉन्ड्रिंग फ्रंट के रूप में काम किया। इस होटल ने पीएफआई को 19 करोड़ रुपये भेजे थे। पीएफआई केरल राज्य कार्यकारी परिषद के सदस्य अशरफ एम के की भूमिका पर ईडी ने कहा कि वह संगठन और संबंधित संस्थाओं के वित्त पोषण में शामिल था। सरकारी अधिकारियों ने कहा कि अशरफ अबू धाबी में दरबार रेस्तरां का मालिक था। जांच में पाया गया कि वह विदेशों में धन जुटाने व एकत्र करने में शामिल था और उसने भूमिगत, अवैध चैनलों के माध्यम से लगभग 19 करोड़ रुपये भारत भेजे।
2010 में प्रोफेसर जोसेफ के हाथ काटने का आरोपी है अशरफ
ईडी ने कहा कि अशरफ ने अपने भाई से लगभग 48 लाख रुपये की अपराध की आय हासिल की, जो दरबार रेस्तरां का प्रबंधन कर रहा था। उसके स्वामित्व वाली एक अन्य कंपनी, तामार इंडिया स्पाइसेस प्राइवेट लिमिटेड का भी अपराध की आय के लिए इस्तेमाल किया गया था। इसमें कहा गया है कि केरल में पीएफआई एर्नाकुलम जिले के पूर्व अध्यक्ष अशरफ को एनआईए ने 2010 में प्रोफेसर जोसेफ के हाथ काटने के मामले में आरोपी के रूप में पेश किया था।