अब तक सरकार ने 29 लाख मोबाइल डिस्कनेक्ट किए हैं
भाजपा सांसद के सवाल पर दूरसंचार मंत्रालय के मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बताया कि तकनीक के दुरुपयोग को लेकर सरकार सतर्क है। गृह मंत्रालय के साथ मिलकर उनका मंत्रालय आपराधिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। नकेल कसने के लिए डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) बनाया गया है, जिसमें 620 संस्थाओं को जोड़ा गया है। देशभर के निजी और प्राइवेट सेक्टर के 570 बैंक, 36 राज्यों की पुलिस और जांच एजेंसियों के अलावा आम नागरिकों को भी इससे जोड़ा गया है। मोबाइल चोरी या ट्रैकिंग रोकने के मकसद से 16 मई 2023 को स्थापित संचार साथी पोर्टल और इसकी सफलता का उल्लेख करते हुए सिंधिया ने बताया कि अब तक 15.5 करोड़ से अधिक हिट्स इस पोर्टल पर आए हैं। इससे प्रेरित होकर सरकार ने इसी साल 17 जनवरी को मोबाइल एप विकसित किया है। इससे लगभग 44 लोग जुड़े (हिट्स) हैं। अब तक सरकार ने 29 लाख मोबाइल डिस्कनेक्ट किए हैं। साढ़े पांच लाख मोबाइल हैंडसेट ब्लॉक किए गए हैं। बल्क में संदेश भेजने की प्रैक्टिस पर भी अंकुश लगा है, ऐसे 20 हजार लोगों को ब्लॉक किया गया है। 24 लाख व्हाट्सएप अकाउंट्स भी ब्लॉक किए गए हैं।
पांच लाख से अधिक मोबाइल उपभोक्ताओं को वापस लौटाने में कामयाबी
संचार साथी एप के बारे में सिंधिया बताया कि उपभोक्ता खुद भी इसकी मदद से मोबाइल चोरी की रिपोर्ट करा सकता है। साथ ही पुलिस के पास भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। 35 लाख कंप्लेन आई है, जिसमें 21 लाख का पता लगाया गया है। इसमें से पांच लाख से अधिक मोबाइल उपभोक्ताओं को वापस लौटाया जा चुका है। इस पोर्टल पर अपने नाम और पहचान पत्र के आधार पर लिए गए मोबाइल नंबर का पता लगाया जा सकता है। अगर उपभोक्ता को लगता है कि उसने खुद मोबाइल कनेक्शन नहीं लिया है, तो वह नंबर ब्लॉक करा सकता है। सरकार ने अब तक इसके आधार पर 1.36 करोड़ नंबर डिस्कनेक्ट किए हैं। सिंधिया ने बताया कि इसकी मदद से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस युग में सरकार ने अस्त्र एप विकसित कराया है। इस एआई की मदद से मोबाइल सरकार ने ऐसे 82 लाख नंबर डिस्कनेक्ट करने में कामयाबी पाई है।
सॉफ्टवेयर विकसित कर आपराधिक तत्वों पर नकेल कसने के प्रयास
विदेश से आने वाले फोन और फ्रॉड से बचाव को लेकर किए जाने वाले उपायों पर सिंधिया ने बताया कि विदेश से आने वाले फोन को ब्लॉक करने के लिए भी सरकार ने बड़ी पहल की है। उन्होंने बताया कि धोखाधड़ी और षड्यंत्र करने वाले लोग / कंपनियों ने भारत के दिखने वाले नंबर का झांसा देकर विदेश से फोन करते हैं। इसे ब्लॉक करने के लिए सेंट्रलाइज्ड इंटरनेशनल रोमिंग रजिस्ट्री (कायॉर) नाम का सॉफ्टवेयर विकसित कर इन आपराधिक तत्वों पर नकेल कसने के प्रयास किए गए हैं। इसकी मदद से ऐसे फोन कॉल में 97 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। कायॉर सॉफ्टवेयर के आधार पर 1.35 करोड़ इंटरनेशनल स्पूफ कॉल को केवल एक दिन में ब्लॉक किया गया है। अब केवल तीन लाख स्पूफ कॉल प्रतिदिन आते हैं।
बैंकों के साथ धोखाधड़ी पर लगाम
सरकार की एक अन्य पहल फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर (FRI) सॉफ्टवेयर के बारे में जानकारी देते हुए सिंधिया ने बताया कि दूरसंचार मंत्रालय धोखाधड़ी रोकने के लिए बैंकों से डेटा लेता है। इसे तीन श्रेणियों में बांटा गया गया है। हाई रिस्क, मीडियम रिस्क और वेरी हाई रिस्क के आधार पर सभी बैंकों के साथ जानकारी साझा की जाती है। अगर कोई शख्स लेनदेन करने जाता है और बैकग्राउंड फ्रॉड करने का है तो दूरसंचार मंत्रालय के माध्यम से बैंक को सूचना स्वत: मिल जाती है, ऐसे ट्रांजैक्शन रोके जाते हैं। FRI के आधार पर अब तक 3.70 लाख लोगों को इन तीन श्रेणियों में रखा गया है। रिस्क की श्रेणी के आधार पर बैंकों से होने वाले कार्ड आधारित फ्रॉड को बड़ी संख्या में रोका गया है। अब तक कार्ड पर डेबिट-क्रेडिट रिस्ट्रिक्शंस लगाकर बैंकों के माध्यम से 3.04 लाख लेन-देन रोके गए हैं। 1.55 हजार बैंक खातों पर भी पाबंदियां लगाई गई हैं। सिंधिया ने बताया कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने भी दूरसंचार मंत्रालय के FRI सॉफ्टवेयर को मान्यता दी है। केंद्रीय बैंक ने सभी बैंकों से इस प्रणाली को अपने सिस्टम में शामिल करने का निर्देश दिया है। ऐसा करने से जनता की पूंजी की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
विदेशी मोबाइल नंबर के साथ इंटरनेशनल लिखा हुआ दिखना अनिवार्य
सिंधिया के जवाब के बाद भाजपा सांसद ने अपने पूरक प्रश्न में दक्षिण पूर्व एशियाई देशों से आने वाले फर्जी फोन को रोकने के लिए किए जा रहे उपायों पर सवाल पूछा। अपने जवाब में सिंधिया ने कहा कि दक्षिण पूर्व एशियाई देशों से बड़ी संख्या में स्पूफ कॉल आते हैं। उन्होंने बताया कि कायॉर की मदद से पहले दिन ही 1.35 करोड़ स्पूफ फोन कॉल ब्लॉक किए गए थे। इंटरनेशनल इनकमिंग स्पूफ कॉल्स प्रीवेंशन स्कीम के आधार पर छह महीने के भीतर संख्या घटकर केवल 3.50 लाख रह गई है। इस उपाय के अलावा सभी दूरसंचार कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि अगर उपभोक्ता को इंटरनेशनल फोन आते हैं तो मोबाइल नंबर के साथ इंटरनेशनल लिखा हुआ भी दिखना चाहिए। अब ऐसा होता भी है। इसके साथ-साथ कंपनियों (TSP) को ऐसे संदिग्ध कोड की पहचान कर गेटवे पर ही ब्लॉक करने को भी कहा गया है। इंटरनेशनल फोन कॉल करने के लिए इन कोड्स का गलत इस्तेमाल किया जाता है। गलत इरादों वाले 300 ऐसे कैरियर्स को देशभर में टीएसपी ने ब्लॉक किया है।
रोमिंग-इंडियन नंबर को संचार साथी पोर्टल से ब्लॉक...
भारत में रोमिंग कार्ड लेने और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में जाने के बाद फोन करने का जिक्र करते हुए सिंधिया ने बताया कि रोमिंग-इंडियन नंबर को संचार साथी पोर्टल की मदद से ब्लॉक किया गया है। 26 लाख ऐसे लिंक्ड रोमिंग नंबर बंद किए गए हैं। इसके अलावा ऐसे 1.23 लाख हैंडसेट्स भी ब्लॉक किए गए हैं।
BSNL-MTNL का 4जी और 5जी कनेक्शन कब मिलेगा?
भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) और एमटीएनएल की बदहाली को लेकर केरल से निर्वाचित आरएसपी सांसद एनके प्रेमचंद्रन ने सवाल किए। उन्होंने बताया कि मेट्रो सिटी में भी बीएसएनएल-एमटीएनएल के नेटवर्क नहीं मिल रहे हैं। मुंबई गई संसदीय समिति को फोन में नेटवर्क नहीं मिलने की समस्या से जूझते हुए निजी कंपनी का कनेक्शन लेना पड़ा। बीएसएनएल और एमटीएनएल का 4जी और 5जी कनेक्शन कब मिलेगा? क्या सरकार फ्रॉड और साइबर अपराध को लेकर बीएसएनएल-एमटीएनएल का अलग से ब्यौरा दे सकती है?
बीते तीन साल में सरकार ने 3.22 लाख करोड़ का पैकेज दिया
इस सवाल पर सिंधिया ने बताया कि पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार बीएसएनएल और एमटीएनएल की रिकवरी के लिए प्रतिबद्ध है। बीते तीन साल में सरकार ने 3.22 लाख करोड़ का पैकेज दिया है। सुधार के संकेत देते हुए सिंधिया ने कहा कि बीएसएनएल ग्राहकों की संख्या 8.55 करोड़ से बढ़कर 9.10 करोड़ हो गई है। दूरसंचार उद्योग के इतिहास में पहली बार देश के सभी 32 टेलिकॉम सर्कल के सीजीएम के साथ बैठक कर परेशानियों को दूर करने का काम शुरू किया गया है। उन्होंने कहा कि बीएसएनएल के सभी सर्कल में भौगोलिक परिस्थितियां, ग्राहकों की संख्या और अन्य पहलुओं को ध्यान में रखते हुए योजनाओं पर काम किया जा रहा है। देश के अलग-अलग सर्किल की योजनाओं में अंतर हो सकता है।
अब तक 20 हजार करोड़ खर्च किए जा चुके हैं
सिंधिया ने बताया कि फिलहाल पूरी दुनिया में साउथ कोरिया, फिनलैंड, डेनमार्क और चीन के अलावा किसी देश में टेलिकॉम उपकरण नहीं बनते। उन्होंने दावा किया कि विश्व इतिहास में पहली बार भारत में स्वदेशी 4जी उपकरण विकसित किए गए हैं। पीएम मोदी के दिशानिर्देश में 4जी स्टैक के लिए कोर सॉफ्टवेयर दुनिया में पहली बार एक सरकारी कंपनी (PSU- सीडॉक) बना रही है। शहरों में दिखने वाले मोबाइल टावर्स- रैंडम एक्सेस नेटवर्क निजी कंपनी तेजस और सी डॉट मिलकर बना रहे हैं। सिस्टम इंडिकेटर्स टीसीएस बना रही है। देशभर में कुल 95 हजार टावर्स लगाए जाने हैं। इस पर 20 हजार करोड़ खर्च किए जा चुके हैं। अब तक 75 हजार टावर लगाए जा चुके हैं जो पूरी तरह काम कर रहे हैं। इन्हें 4जी कोर सॉफ्टवेयर से इंटीग्रेट करने का प्रयास किया जा रहा है।
MTNL इसी साल जनवरी में बीएसएनएल में लाया गया
सिंधिया ने कहा, बीएसएनएल का 4जी नेटवर्क आ चुका है। इसे और बेहतर और सुदृढ़ करने का प्रयास जारी है। इसके बाद सरकार 5जी नेटवर्क लाने को भी प्रतिबद्ध है। एमटीएनएल का एरिया ऑफ ऑपरेशन मुंबई और दिल्ली है। इसे इसी साल जनवरी में बीएसएनएल में लाया गया है। एमटीएनएल के उन इलाकों में भी 4जी सेवाओं को बहाल करने के प्रयास जारी हैं।