Telangana Tunnel Collapses: सुरंग के अंदर भारी मात्रा में कीचड़ और पानी होने के कारण बचाव दलों के लिए चुनौती खड़ी हो गई है। नगरकुर्नूल के पुलिस अधीक्षक वैभव गायकवाड ने सोमवार को कहा था कि राज्य सरकार बचाव अभियान में बचाव दल को किसी भी खतरे से बचाने के लिए रोबोट तैनात करने पर विचार कर रही है।
तेलंगाना में आंशिक रूप से ध्वस्त सुरंग के अंदर कन्वेयर बेल्ट को ठीक कर लिया गया है और उसने मंगलवार को काम करना शुरू कर दिया। एक अधिकारी ने बताया कि इससे बचाव कर्मियों को सुविधा होगी और अंदर फंसे मलबे आदि को निकालने में आसानी और तेजी आएगी। कन्वेयर बेल्ट 22 फरवरी को हादसे के बाद क्षतिग्रस्त हो गई थी। इस बीच दक्षिण मध्य रेलवे की विशेषज्ञ टीम ने सुरंग के अंदर बोरिंग मशीन के क्षतिग्रस्त प्लेटफॉर्म को काट दिया है।
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अधिकारी ने बताया कि श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल (एसएलबीसी) परियोजना की ध्वस्त सुरंग के अंदर बचाव अभियान में तेजी आएगी। उन्होंने बताया कि सुरंग के अंदर फंसे हुए आठ लोगों को खोजने के प्रयासों में अब तक कोई सफलता नहीं मिली है। बचावकर्मी हर दिन तीन पालियों में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मलबा हटाने और पानी निकालने की प्रक्रिया जारी है।
कन्वेयर बेल्ट चालू
दरअसल सुरंग के अंदर भारी मात्रा में कीचड़ और पानी होने के कारण बचाव दलों के लिए चुनौती खड़ी हो गई है। नगरकुर्नूल के पुलिस अधीक्षक वैभव गायकवाड ने सोमवार को कहा था कि राज्य सरकार बचाव अभियान में बचाव दल को किसी भी खतरे से बचाने के लिए रोबोट तैनात करने पर विचार कर रही है। वैभव गायकवाड़ ने बताया कि आज सुबह कन्वेयर बेल्ट चालू कर दिया गया है... रेलवे प्लाज्मा मशीनें भी यांत्रिक मलबे को हटाने के लिए काम कर रही हैं।
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अंदर भारी मात्रा में कीचड़ और पानी बना मुसीबत
एसएलबीसी सुरंग परियोजना के इंजीनियर प्रभु श्रीवास्तव का कहना है कि, मशीनों द्वारा कटाई का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। खुदाई करने वाली मशीनें अंदर जाएंगी और कन्वेयर बेल्ट पर मलबा बाहर भेजेंगी। रैट माइनर्स, एनडीआरएफ और अन्य टीमें उन जगहों पर काम कर रही हैं जिन्हें चिन्हित किया गया है। हम नहीं कह सकते कि इसमें और कितने दिन लगेंगे। सुरंग के अंदर भारी मात्रा में कीचड़ और पानी होने के कारण बचाव अभियान में शामिल टीमों के लिए चुनौती उत्पन्न हो गई।
दरअसल एसएलबीसी परियोजना में 22 फरवरी से इंजीनियर और मजदूर सहित आठ लोग फंसे हुए हैं। सुरंग के अंदर फंसे लोगों को निकालने के लिए एनडीआरएफ, सेना, नौसेना और अन्य एजेंसियों के विशेषज्ञ अथक प्रयास कर रहे हैं।