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Telangana: ग्रामीण-मुस्लिम वोटों के झुकाव ने कांग्रेस को दिलाई कुर्सी, बीआरएस के काम नहीं आया ओवैसी का समर्थन

Mon, 04 Dec 2023 05:40 AM IST
जलज मिश्रा नितिन यादव, हैदराबाद

सार

सरकार की तमाम योजनाओं से मुकाबले के लिए कांग्रेस ने अपनी छह गारंटियों के साथ लोकलुभावन घोषणा पत्र दिया था। ओवैसी का समर्थन इस बार बीआरएस के काम नहीं आया। हैदराबाद के बाहर तो अधिकांश मुस्लिम वोट कांग्रेस को मिले।
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KCR - फोटो : Social Media
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विस्तार
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लगभग 10 साल तक भारत राष्ट्र समिति जिन घोषणाओं और वोटबैंक के सहारे मजबूती से सत्ता में बनी रही, अब उन्हीं के कारण सरकार विदा हो गई। लोकलुभावन योजनाओं व तेलंगाना की अस्मिता के दांव पर केसीआर दो बार मुख्यमंत्री बने। कांग्रेस ने सत्ता लेने के लिए उसी अंदाज में काम किया।
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सरकार की तमाम योजनाओं से मुकाबले के लिए कांग्रेस ने अपनी छह गारंटियों के साथ लोकलुभावन घोषणा पत्र दिया था। ओवैसी का समर्थन इस बार बीआरएस के काम नहीं आया। हैदराबाद के बाहर तो अधिकांश मुस्लिम वोट कांग्रेस को मिले। इतना ही नहीं ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों ने कांग्रेस को बहुमत के आंकड़े तक पहुंचाने में काफी मदद की। नतीजा यह हुआ कि बीआरएस 88 से घटकर 40 पर आई और कांग्रेस की सीटें 19 से बढ़कर 63 हो गईं। भाजपा को पिछले विधानसभा चुनाव में महज एक सीट मिली थी। इस बार आठ सीटें जीतकर उसने भी प्रदर्शन सुधारा है। कांग्रेस की सहयोगी सीपीआई को एक सीट मिली। दरअसल, दोनों ओर से तमाम घोषणाओं के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में यह हवा चली कि जब सब कुछ ज्यादा या फिर वैसा ही मिलेगा तो बदलकर देखते हैं। कांग्रेस की घोषणाओं में हिंदू बेटियों को शादी में एक लाख रुपये व 10 ग्राम सोना और अल्पसंख्यक वर्ग की बेटियों की शादी में 1.60 लाख रुपये देने का भी वादा किया था।

गढ़ के बाहर ओवैसी बेअसर
ओवैसी हर बार सात सीटों पर ही चुनाव लड़ते हैं। इस बार उन्होंने जुबली हिल्स में बीआरएस का प्रत्याशी होते हुए भी कांग्रेस के अजहरूद्दीन के सामने प्रत्याशी उतारा। इसे कांग्रेस ने मुस्लिम वोटों के बंटवारे की बात कह कर प्रचारित किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रेवंत रेड्डी ने तो गोशामहल में प्रत्याशी न उतारे जाने पर भी सवाल उठाए। यही वजह रही कि हैदराबाद के बाहर मुस्लिम वोटरों ने कांग्रेस को खुला समर्थन दिया।
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