तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव ने 7वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि मैं विरोध के रूप में कल दिल्ली में होने वाली नीति आयोग की 7वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक का हिस्सा नहीं बनूंगा।
केसीआर ने नीति आयोग की 7वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक में शामिल नहीं होने के लिए पीएम मोदी को पत्र लिखा। उन्होंने केंद्र सरकार पर राज्यों को कम अधिकार देने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि लोगों को अधिकतम लाभ सुनिश्चित करने के लिए उनकी जरूरतों और शर्तों के आधार पर योजनाओं को डिजाइन और संशोधित करने के लिए राज्यों को पर्याप्त अधिकार नहीं दिए जा रहे हैं। यही केंद्र के खिलाफ मेरी नाराजगी का सबसे बड़ा कारण है।
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सात अगस्त यानी कल नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस दौरान फसल विविधिकरण व राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कार्यान्वयन समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
नीति आयोग ने दिया जवाब
इसके बाद नीति आयोग ने केसीआर के बयान का जवाब दिया। आयोग की ओर से कहा गया कि राज्यों के साथ मिलकर काम करने के लिए पहले से ही कई तरह के उपाय किए जा रहे हैं। पिछले साल सीएम के साथ 30 से अधिक बैठकें हुईं। प्रतिनिधिमंडल ने पिछले साल हैदराबाद में तेलंगाना के सीएम से भी मुलाकात की। हाल ही में एक बैठक के अनुरोध के बावजूद सीएम ने कोई जवाब नहीं दिया।
नीति आयोग के मुताबिक, पिछले 4 वर्षों में भारत सरकार ने तेलंगाना राज्य के लिए जल जीवन मिशन के तहत 3982 करोड़ रुपये आवंटित किए, लेकिन राज्य ने केवल 200 करोड़ रुपये निकालने का फैसला किया। इसके अलावा 2014-2015 से 2021-2022 के दौरान PMKSY-AIBP-CADWM के तहत तेलंगाना को 1195 करोड़ रुपये जारी किए गए।
नीति आयोग ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मुख्यमंत्री तेलंगाना ने नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में भाग नहीं लेने का फैसला किया। गवर्निंग काउंसिल एक ऐसा मंच है जहां सर्वोच्च राजनीतिक नेतृत्व विकास संबंधी मुद्दों पर विचार-विमर्श करता है और राष्ट्रीय विकास के लिए उचित समाधान पर सहमत होता है।