इस पार्टी का सियासी इतिहास बेहद दिलचस्प है। 1928 में नवाब महमूद नवाज खान ने इसकी स्थापना की थी। ये संगठन हैदराबाद को अलग मुस्लिम राष्ट्र बनाने की मांग करता था। 1948 में हैदराबाद के भारत विलय के बाद संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया गया। 1957 में पार्टी से पाबंदी हटी तो इसमें ऑल इंडिया नाम जोड़ दिया गया और संविधान भी बदला गया। हैदराबाद के खिलाफ भारत सरकार की कार्रवाई के समय कासिम रिजवी इसके अध्यक्ष थे। पाकिस्तान जाने से पहले वह पार्टी की कमान मशहूर वकील अब्दुल वाहेद ओवैसी के हाथ दे गए।
तभी से पार्टी ओवैसी परिवार के हाथों में रही। अब्दुल वाहेद के बाद सलाहुद्दीन ओवैसी पार्टी के अध्यक्ष बने। अब उनके बेटे असदुद्दीन ओवैसी एआईएमआईएम के अध्यक्ष और सांसद हैं। छोटे भाई अकबरुद्दीन ओवैसी विधानसभा में पार्टी के नेता हैं। ये वही अकबरुद्दीन हैं जो अपने भड़काऊ भाषण के लिए जेल भी जा चुके हैं। आज भी विरोधी पार्टियां अकबरुद्दीन के उसी भाषण का जिक्र कर असदुद्दीन ओवैसी और उनकी पार्टी को निशाना बनाते हैं।
हैदराबाद सीट रही ओवैसी परिवार के कब्जे में
1984 में अब्दुल ओवैसी पहली बार हैदराबाद से जीतकर लोक सभा पहुंचे। इसके बाद से ही जीत का सिलसिला उनके बेटे असदुद्दीन ओवैसी ने जारी रखा। एआईएमआईएम और ओवैसी पर सांप्रदायिक होने के आरोप लगते रहे हैं। छोटे भाई अकबरुद्दीन के एक भड़काऊ बयान ने न सिर्फ उन्हें जेल पहुंचाया, असदुद्दीन ओवैसी के लिए असहज स्थिति भी पैदा कर दी। चाहे बात पीएम मोदी को उनके बयानों पर घेरने की हो, या कांग्रेस को खरी खरी सुनाने की, ओवैसी ने सख्त बयानों ने उन्हें खूब सुर्खियां दिलाई हैं। ओवैसी अब हैदराबाद के बाहर पार्टी का प्रभाव बढ़ाने की जुगत में हैं। महाराष्ट्र में वह लगातार अपना प्रभाव बढ़ा रहे हैं। बिहार में विधानसभा चुनाव में पार्टी को उतार चुके हैं। अब तेलंगाना में केसी राव की पार्टी से उनका अंदरखाने का समझौता बताया जाता है।