रविवार को गांधी जयंती के मौके पर बिना नाम लिए सरकार और भाजपा पर हमला किया। उन्होंने कहा कि जहां तक टारगेटेड हिंसा की बात आती है वहां, कभी राज्य की जवाबदेही नहीं देखी गई। उन्होंने गुजरात दंगों के संदर्भ में कहा कि टारगेटेड हिंसा की शुरूआत नफरत भरे भाषणों और घृणास्पद लेखन के साथ शुरू होती है। गौरतलब है कि तीस्ता सीतलवाड़ को 2002 के गुजरात दंगों के मामलों में निर्दोष लोगों को फंसाने के लिए कथित रूप से दस्तावेज बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
गुजरात की राजधानी अहमदाबाद के गिरीश पटेल स्मरणंजलि व्याख्यान में बोलते हुए सीतलवाड़ ने कहा कि इस तरह की हिंसा से बचे लोगों को अपराधियों के लिए सजा सुनिश्चित करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सवाल किया कि 1984, 1992 और 2002 के (दंगों) में कितने लोगों को दंडित किया गया है? ये हमारे सामने सवाल हैं। उन्होंने आगे कहा कि ध्रुवीकरण पर सोशल मीडिया का प्रभाव बहुत ज्यादा है।जनता के बीच एक गहरे ध्रुवीकरण के मुद्दे पर काम करना आसान नहीं है। सत्ता में बैठे लोग वही हैं जो सोशल मीडिया को नियंत्रित कर रहे हैं। इन लोगों ने समाज में, सड़कों पर, डॉक्टरों, वकीलों और सांस्कृतिक संगठनों के बीच 70-80 साल बिताए हैं।
उन्होंने कहा कि देश में हिंसा को अंजाम देने वाले लोगों और सत्ताधारी पार्टी द्वारा उन्हें समर्थन देने की प्रक्रिया देखी जा रही है। ये कोई नई बात नहीं है, इसका एक पुराना इतिहास है। आज, किसी को भी मीडिया से जूझना पड़ता है, जो किसी भी तरह से धमकी देने वाले व्यक्तियों और आंदोलनों को टारगेट करने का एक निर्धारित एजेंडा चला रहे हैं।
तीस्ता पर लोगों को फंसाने के लिए झूठे सबूत गढ़ने का आरोप
गौरतलब है कि तीस्ता सीतलवाड़ और श्रीकुमार दोनों को जून में गिरफ्तार किया गया था, उन पर 2002 के गोधरा दंगों के बाद के मामलों में निर्दोष लोगों को फंसाने के लिए सबूत गढ़ने का आरोप है। वे साबरमती केंद्रीय जेल में बंद हैं। श्रीकुमार ने जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है। मामले के तीसरे आरोपी पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट ने जमानत के लिए आवेदन नहीं किया है। भट्ट पहले से ही एक अन्य आपराधिक मामले में जेल में थे जब उन्हें इस मामले में गिरफ्तार किया गया था।