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अपने बच्चे के सर्टिफिकेट से पिता का नाम हटाने के लिए मां ने लड़ी कानूनी लड़ाई

Sun, 20 May 2018 01:14 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चैन्ने
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संकेतात्मक तस्वीर
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भारत को पहला ऐसा बच्चा मिला है जिसका पिता नहीं है। यह बात उसके जन्मप्रमाण पत्र से साबित हो जाती है। मद्रास हाईकोर्ट द्वारा प्राधिकारियों को दिए गए आदेश के बाद पिता के नाम वाले कॉलम को खाली रखा गया है। मधुमिता रमेश नाम की महिला ने इसके लिए लंबी कानूनी लड़ाई है। उन्होंने अपनी बेटी तविशी परेरा के जन्मप्रमाण पत्र में पिता के नाम वाले स्थान को खाली रखे जाने के लिए दो याचिकाएं दायर की थी। 

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मधुमिता आपसी सहमति के जरिए अपने पति चरण राज से अलग हो गई थीं। तविशी का जन्म अप्रैल 2017 में इंट्रायूटरिन फर्टिलिटी ट्रीटमेंट (आईयूआई) के जरिए एक स्पर्म डोनर से हुआ। त्रिची के निगम आयुक्त ने हालांकि बच्ची के प्रमाणपत्र में मनीश मदनपाल मीणा नाम के शख्स का नाम पिता वाले कॉलम में लिख दिया। मीणा ने ट्रीटमेंट के दौरान मधुमिता की मदद की थी। जब उन्होंने अधिकारियों से मीणा का नाम हटाने के लिए कहा तो उन्होंने साफ मना कर दिया।

अधिकारियों ने कहा कि वह केवल किसी के नाम की त्रुटियों का पता लगाने पर ठीक कर सकते हैं। वहीं किसी के नाम को हटाना संभव नहीं है। 4 सितंबर 2017 को मिले आश्वासन के बाद मधुमिता हाईकोर्ट चली गईं। जिसने राजस्व अधिकारी को आदेश दिया कि वह प्रमाणपत्र को सुधारें। लेकिन राजस्व अधिकारी को दिया गया उनका आवेदन एक बार फिर रद्द हो गया। विभाग ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि जन्म और मृत्यु के रजिस्ट्रार ही इस मामले को सुलझा सकते हैं। 
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फिर दोबारा मधुमिता ने कोर्ट में अपील दायर की जहां उनके वकील ने कहा कि प्रमाणपत्र में मीणा का नाम गलती से लिखा गया है। दिलचस्प बात यह रही कि मीणा और मधुमिता के पति चरण राज ने अलग-अलग याचिका दायर करते हुए कहा कि वह बच्चे के पिता नहीं हैं। जिसके आधार पर हाईकोर्ट के जस्टिस एमएस रमेश ने मधुमिता की बात को स्वीकार कर लिया।

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