भारी स्कूल बैग से मिलेगा छुटकारा
बच्चों को मोटी-मोटी किताबें नहीं पढ़नी पड़ेंगी। नई नीति में बच्चों को हर विषय के मूल सिद्धांत को आसान तरीकों से समझाया जाएगा। ऐसे में पूरा जोर लिखित परीक्षा की जगह प्रयोगात्मक परीक्षा पर होगा। पढ़ाई का फोकस और कांस्पेट्स, आइडिया, एप्लीकेशन, प्रैक्टिकल, प्राब्लम साल्विंग पर रहेगा। सरकार का मानना है कि दो से आठ साल तक बच्चा सबसे अधिक सीखता है। इसलिए इस उम्र में सीखने पर जोर दिया जाए।
कस्तूरबा गांधी स्कूलों का विस्तार 12वीं कक्षा तक होगा। जिनकी इकलौती संतान बेटी हो और बेटियों को शिक्षा में बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं बनेंगी। स्कूलों में अपने विषय के साथ-साथ बहुविषयक जानकारियों को बढ़ावा दिया जाएगा। लाइफ स्किल पर अधिक फोकस होगा।
स्कूली शिक्षा की हर पांच वर्ष में समीक्षा
गुणवत्ता सुधारने की की शुरुआत स्कूली शिक्षा से करने के लिए हर पांच साल में समीक्षा होगी। वर्ष 2022 के बाद पैराटीचर नहीं रखे जाएंगे। शिक्षकों की भर्ती सिर्फ नियमित होगी। रिटायरमेंट से पांच साल पहले शिक्षकों की नियुक्ति का काम केंद्र और राज्य शुरू कर देंगे। कूषि और स्वास्थ की पढ़ाई सामान्य विश्वविद्यालयों के साथ प्रोफेशनल संस्थान में छोटे कोर्स पर जोर होगा।