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तमिलनाडु बनाम कर्नाटक: स्टालिन ने येदियुरप्पा से किया मेकेदातु परियोजना रद्द करने का आग्रह

Sun, 04 Jul 2021 05:40 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई

सार

कर्नाटक व तमिलनाडु के बीच अब मेकेदातु परियोजना को लेकर तकरार की तैयारी है। सीएम एमके स्टालिन ने सीएम बीएस येदियुरप्पा से इस पर अमल न करने का दृढ़ आग्रह किया है।
 
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विस्तार
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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने रविवार को कर्नाटक के अपने समक्ष बीएस येदियुरप्पा से मेकेदातु परियोजना पर आगे नहीं बढ़ने का आग्रह किया। एक दिन पहले येदियुरप्पा ने स्टालिन से इस पहल का विरोध नहीं करने का अनुरोध किया था। स्टालिन ने कर्नाटक के इस मत को खारिज किया कि इस परियोजना के कार्यान्वयन से तमिलनाडु के किसानों के हित प्रभावित नहीं होंगे। उन्होंने येदियुरप्पा को लिखे पत्र में कहा कि इस विचार पर सहमति नहीं हो सकती। दोनों मुख्यमंत्री के रुख को देखते हुए लगता है कि अब इस मुद्दे पर दोनों राज्यों के बीच तकरार तेज होने वाली है। 

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स्टालिन ने येदियुरप्पा को लिखे जवाबी पत्र में कहा, 'मैं कर्नाटक के लोगों के प्रति शुभकामना व्यक्त करता हूं। उम्मीद करता हूं कि दोनों राज्यों के बीच अच्छे सहयोग व संबंध कायम होंगे।' इसके साथ ही तमिलनाडु के सीएम ने येदियुरप्पा से दृढ़ता से आग्रह किया है कि वे मेकेदातु प्रोजेक्ट को लेकर आगे न बढ़ें। 
 
येदियुरप्पा ने शनिवार को स्टालिन को पत्र लिखकर मेकेदातु परियोजना का विरोध नहीं करने का अनुरोध किया था जो जलाशय-सह-पेयजल परियोजना को संतुलित करती है। इसके अलावा येदियुरप्पा ने सभी आशंकाओं को दूर करने के लिए दोनों राज्यों के बीच द्विपक्षीय बैठक की पेशकश की थी।
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स्टालिन ने कहा कि मेकेदातु परियोजना तमिलनाडु को जाने वाले काबिनी उप-बेसिन, कृष्णराजसहारा के नीचे के जलग्रहण क्षेत्र, सिम्शा, अर्कावती और सुवर्णावती के अलावा अन्य छोटी धाराओं से अनियंत्रित जल प्रवाह को 'रोक और मोड़' देगी।


उन्होंने कहा कि कर्नाटक द्वारा तमिलनाडु को दिए जाने वाले पानी की वार्षिक मात्रा में योगदान देने वाले तीन घटकों में से एक अनियंत्रित जल प्रवाह है और इसे उच्चतम न्यायालय द्वारा संशोधित कावेरी प्राधिकरण के आदेश में मान्यता दी गई है। स्टालिन ने कहा, 'इसलिए, हम इस विचार से सहमत नहीं हैं कि मेकेदातु परियोजना के कार्यान्वयन से तमिलनाडु के कृषक समुदाय के हित प्रभावित नहीं होंगे।'

येदियुरप्पा द्वारा तमिलनाडु की दो जल विद्युत परियोजनाओं जैसी पहलों का जिक्र किए जाने पर स्टालिन ने कहा तमिलनाडु की दो पनबिजली परियोजनाओं के साथ 67.16 टीएमसी पानी के भंडारण के लिए बनाई गई मेकेदातु परियोजना की तुलना सही नहीं होगी। इन दो पनबिजली परियोजनाओं में पानी की कोई खपत नहीं होती है, उपलब्ध पानी को अधिकतम बिजली की मांग को पूरा करने के लिए पम्पिंग द्वारा फिर से इस्तेमाल में लाया जाता है।

स्टालिन ने कहा कि चूंकि कोई अतिरिक्त उपयोग नहीं हुआ है, इसलिए दोनों परियोजनाएं तमिलनाडु में सिंचाई या पीने के उपयोग के लिए पानी की उपलब्धता को प्रभावित नहीं करती हैं। उन्होंने कहा, 'इसलिए, मैं फिर से इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि गुणात्मक रूप से भिन्न ऐसी परियोजनाओं की तुलना उचित नहीं है।'

स्टालिन ने कहा कि अदालत ने बेंगलुरु में पीने के पानी के उपयोग के लिए नदी से पानी निकालने की अनुमति दी है, ऐसे में मेकेदातु में इस तरह के एक बड़े जलाशय के निर्माण का कारण वैध नहीं लगता, जो कि बेंगलुरु महानगरीय क्षेत्र से बहुत दूर है। उन्होंने कहा, 'यह निश्चित रूप से तमिलनाडु की पानी की उपलब्धता को खतरे में डालेगा।'
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