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Tamil Nadu: 'आपका दोषारोपण कोई मायने नहीं रखता', भाषा विवाद पर भाजपा अध्यक्ष अन्नामलाई ने सीएम पर साधा निशाना

Fri, 07 Mar 2025 12:24 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई

सार

तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष के अन्नामलाई ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा कि 'थिरु एमके स्टालिन, हमारा ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान को बीते 36 घंटे में पूरे तमिलनाडु में दो लाख से ज्यादा लोगों ने समर्थन दिया है।'
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के अन्नामलाई और एम के स्टालिन - फोटो : एजेंसी
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विस्तार
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तमिलनाडु में नई शिक्षा नीति के तहत तीन भाषाएं पढ़ाने के विवाद में सत्ताधारी डीएमके और भाजपा के बीच जुबानी जंग जारी है। अब तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष के अन्नामलाई ने दावा किया है कि उनके हस्ताक्षर अभियान को लोगों का भरपूर समर्थन मिल रहा है और राज्य के लोग बड़ी संख्या में उनकी पार्टी के इस अभियान में शामिल हो रहे हैं।
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क्या बोले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई
तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष के अन्नामलाई ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा कि 'थिरु एमके स्टालिन, हमारा ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान को बीते 36 घंटे में पूरे तमिलनाडु में दो लाख से ज्यादा लोगों ने समर्थन दिया है। तमिलनाडु सीएम इससे खिन्न हैं और आपका दोषारोपण हमारे अभियान के लिए कोई मायने नहीं रखता।' अन्नामलाई ने डीएमके पर तंज कसते हुए कहा कि डीएमके सत्ता में होने के बावजूद ऐसा हस्ताक्षर अभियान नहीं चला सकी है। अन्नामलाई ने सीएम स्टालिन पर हिंदी थोपे जाने जैसे भ्रामक दावे करने का भी आरोप लगाया। अन्नामलाई ने कहा कि 'आपका हिंदी थोपने का फर्जी ड्रामा सबके सामने खुलकर आ गया है, लेकिन दुर्भाग्य से आपको अभी तक इसका अहसास नहीं हुआ है।'

सीएम स्टालिन ने भाजपा के हस्ताक्षर अभियान पर कसा था तंज
के अन्नामलाई का यह बयान सीएम स्टालिन के उस बयान के बाद सामने आया है, जिसमें स्टालिन ने भाजपा के हस्ताक्षर अभियान का मजाक उड़ाया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा था कि 'अब भाजपा हस्ताक्षर अभियान का सर्कस कर रही है और यह पूरे तमिलनाडु में हंसी का पात्र बन गया है। मैं चुनौती देता हूं कि वे इसे 2026 के विधानसभा चुनाव में अपना मुख्य एजेंडा बनाकर दिखाएं और राज्य में हिंदी थोपे जाने को लेकर जनमत संग्रह कर लें। इतिहास से साफ है कि जिसने भी तमिलनाडु में हिंदी थोपने की कोशिश की, या तो उसे हार का सामना करना पड़ा या फिर उसे अपना पक्ष बदलना पड़ा और डीएमके के साथ आना पड़ा। तमिलनाडु ब्रिटिश औपनिवेश के बाद हिंदी औपनिवेश को सहन नहीं करेगा।'
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