केंद्रीय मंत्री मुरुगन के पिता ने बताया कि उनका बेटा पढ़ाई में बहुत अच्छा था। शुरुआत में सरकारी स्कूल में पढ़ाई की। फिर बाद में मुरुगन ने चेन्नई के आंबेडकर लॉ कालेज से कानून की पढ़ाई की। पिता को बेटे की पढ़ाई के लिए दोस्तों में पैसे उधार लेने पड़े थे। मुरुगन ने भाजपा की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष बनने के बाद चेन्नई में अपने माता-पिता को साथ रहने के लिए बुलाया था, लेकिन कुछ ही दिनों बाद वे लौट गए। मुरुगन की मां ने कहा, ''हमलोग कभी-कभी तीन-चार दिनों के लिए चेन्नई जाते थे, लेकिन उसकी व्यस्तता में हम फिर नहीं हो पाए। इस लिए हमलोग फिर से अपने गांव कोन्नूर आए।''
पूछा- क्या ये भाजपा इकाई के अध्यक्ष पद से बड़ा है?
बताया जा रहा है कि एल मुरुगन ने मंत्री बनने के बाद अपने माता-पिता को फोन किया था। तब इन दोनों ने उनसे पूछा था कि क्या तमिलनाडु भाजपा इकाई के अध्यक्ष पद से उनका मौजूदा पोस्ट बड़ा है। मुरुगन के माता-पिता कहने हैं, 'हमारा बेटा बड़े पद पर पहुंच गया है। मां-बाप के तौर पर हमारे लिए ये बड़ी उपलब्धि है।
मुरुगन के पास दो-दो मंत्रालय का है प्रभार
केंद्रीय मंत्री मुरुगन के पास केंद्र में मत्स्य पालन, पशुपालन और सूचना तथा प्रौद्योगिकी मंत्रालय है। उन्हें दोनों विभागों में राज्य मंत्री बनाया गया है। मुरुगन ने 7 जुलाई को बाकी नए सदस्यों संग शपथ ली थी। वह इस साल विधानसभा चुनाव लड़े थे मगर डीएमके उम्मीदवार से हार गए।