यह जयललिता और करुणानिधि की अनुपस्थिति में राज्य का पहला चुनाव था। हर बार डीएमके और अन्ना डीएमके के बीच सत्ता का हस्तांतरण की परंपरा के तहत इस बार डीएमके के बेहतर प्रदर्शन की आशा तो थी लेकिन अन्नाद्रमुक की राज्य सरकार और उसकी धड़ेबाजी के चलते कांग्रेस-डीएमके गठबंधन को 32 सीटें मिलीं जबकि अन्नाद्रमुक को सिर्फ दो। चार सीटें वाम दलों के हिस्से में आईं।
राज्य की 39 में से 38 सीटों पर ही चुनाव हुआ। लेकिन जयललिता के भतीजे दिनाकरन के नेतृत्व में अन्नाद्रमुक के धड़े ने सत्तारूढ़ धड़े को खासा नुकसान पहुंचाया। दल-बदल कानून के तहत उनके खेमे के 22 विधायकों की सदस्यता खारिज कर दी गई, जिसके बाद इन सीटों के लिए उप चुनाव कराए गए। इनके नतीजे भी आज घोषित किए गए। (देखें बॉक्स) दूसरी ओर, डीएमके के लिए, यह स्टालिन के नेतृत्व में पहला चुनाव था। आज के नतीजों ने न केवल उनके नेतृत्व पर मुहर लगाई है, बल्कि करुणानिधि के निधन के बाद डीएमके लिए उम्मीदों की नई राह खोली है।
कुल सीटेंः 39
भाजपा+ कांग्रेस डीएमके अन्ना अन्य
2019 00 08 23 01 06
2014 01 00 00 37 01
2009 00 08 18 09 04
बनी रहेगी पलानीस्वामी सरकारः 22 विधानसभा सीटों के लिए हुए उपचुनाव में द्रमुक को 13 और अन्नाद्रमुक को 9 सीटें हासिल हुईं। 234 सदस्यीय विधानसभा में अन्नाद्रमुक के 114 और द्रमुक के 88 सदस्य थे। बहुमत के लिए अन्नाद्रमुक को उपचुनावों में सिर्फ चार सीटे हीं चाहिए थीं।