तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि और सरकार के बीच चल रही तनातनी के बीच आखिरकार ऑनलाइन जुए पर प्रतिबंध लगाने वाले एक विधेयक को मंजूरी दे दी है। राज्यपाल आरएन रवि ने बीते महीने इस विधेयक को पारित होने के 131 दिन बाद लौटा दिया था। इसके बाद स्टालिन कैबिनेट ने इस पारित करके दोबारा राज्यपाल के पास भेजा था। राज्यपाल आरएन रवि का यह कदम तब आया है जब स्टालिन सरकार ने सोमवार को राज्य विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश करके केंद्र सरकार और राष्ट्रपति से राज्यपाल के लिए विधेयक को मंजूरी देने की समयसीमा तय करने का आग्रह किया।
स्टालिन सरकार ने राज्यपाल के लिए दिशा-निर्देश की मांग वाला प्रस्ताव किया पेश
वहीं, विधेयकों को लंबे समय तक अपने पास रोके रखने पर विरोध जताते हुए स्टालिन सरकार ने सोमवार को राज्य विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया। इसमें केंद्र सरकार और राष्ट्रपति से आग्रह किया गया कि वे विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों को एक निश्चित अवधि के भीतर स्वीकृति देने के लिए तुरंत तमिलनाडु के राज्यपाल को उचित निर्देश जारी करें। तमिलनाडु के मंत्री दुरई मुरुगन ने राज्य विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने तमिलनाडु की विधानसभा की विधायी शक्ति स्थापित करने और राज्यपाल को लोगों के हितों के खिलाफ कार्य करने से रोकने के लिए केंद्र सरकार और राष्ट्रपति से आग्रह किया गया कि वे विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों को एक निश्चित अवधि के भीतर स्वीकृति देने के लिए तुरंत तमिलनाडु के राज्यपाल को उचित निर्देश जारी करें। वहीं,मुख्यमंत्री ने भी राष्ट्रपति से इस मामले में आदेश जारी करने का आग्रह किया। स्टालिन ने विधानसभा में कहा कि लोगों के हितों के खिलाफ जो लोग काम कर रहे हैं। उन्हें जल्द रोका जाना चाहिए। इस प्रस्ताव के पक्ष में डीएमके और उसके सहयोगी दलों ने मतदान किया। वहीं, अन्नाद्रमुक विधायकों ने बोलने का समय नहीं देने का आरोप लगाया और सदन से बाहर चले गए।
131 दिन बाद राज्यपाल ने वापस कर दिया था विधेयक
गौरतलब है कि ऑनलाइन जुए में पैसा गंवाने के बाद हाल में पूरे तमिलनाडु में 41 लोगों ने आत्महत्या कर ली थी। जिसके बाद स्टालिन सरकार, इसे रोकने के लिए कदम उठाते हुए एक विधेयक लाई थी। तब ऑनलाइन जुआ निषेध विधेयक 19 अक्टूबर, 2022 को विधानसभा में पारित किया गया था और 26 अक्टूबर, 2022 को राज्यपाल की सहमति के लिए भेजा गया था। 23 नवंबर, 2022 को राज्यपाल ने स्पष्टीकरण मांगा। इसके बाद स्पष्टीकरण दिया गया। हालांकि, 131 दिनों के बाद इसे 6 मार्च, 2023 को स्पष्टीकरण मांगते हुए वापस कर दिया गया था। जिसका कई सदस्यों विरोध किया था।
इसके बाद एक बार फिर स्टालिन सरकार इस विधेयक को विधानसभा में लाई थी और दोबारा राज्यपाल के पास भेजा था। उससे पहले भी एआईएडीएमके सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग को विनियमित करने के लिए इसी तरह का कानून बनाया गया था, लेकिन एक अदालत ने इसे रद्द कर दिया था।
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वहीं, राज्यपाल द्वारा विधेयकों को अनिश्चितकाल के लिए रोके रखने की तमिलनाडु के सीएम ने निंदा की थी। उन्होंने कहा कि यह तमिलनाडु के लोगों के कल्याण के खिलाफ है। राज्यपाल की विवादास्पद टिप्पणियां सदन की गरिमा को कम करती हैं और संसदीय लोकतंत्र में विधायिका के वर्चस्व को कमजोर करती हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा बीस अन्य बिल अभी भी राज्यपाल के पास लंबित हैं।