भारी विरोध को देखते हुए तमिलनाडु की स्टालिन सरकार ने धर्मपुरम अधीनम के पट्टिना प्रवेशम अनुष्ठान पर प्रतिबंध लगाने के अपने आदेश को रद्द कर दिया है। इसको लेकर तमिलनाडु में राजनीतिक संकट खड़ा हो गया था।
तमिलनाडु में डीएमके सरकार ने रविवार को धर्मपुरम अधीनम के पट्टिना प्रवेशम अनुष्ठान पर प्रतिबंध लगाने के अपने आदेश को रद्द कर दिया है। धर्मपुरम अधीनम के महंत को पालकी में ले जाने वाले भक्तों की परंपरा 'पट्टिना प्रवेशम' 22 मई को होगी। यह आदेश मयिलादुथुराई जिला राजस्व मंडल अधिकारी (आरडीओ) ने रविवार को जारी किया।
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इससे पहले तमिलनाडु के मयीलादुथुरई जिले के राजस्व अधिकारियों की ओर से सदियों पुरानी पट्टिना प्रवेशम परंपरा पर प्रतिबंध लगाने का फैसला जारी किया गया था। जिसके बाद यहां बड़ा विवाद शुरू हो गया था। इसे देखते हुए ही तमिल सरकार ने ये आदेश रद्द कर दिया है। इस परंपरा में महंत को अनुयायियों द्वारा पालकी में ले जाया जाता है। कार्यक्रम मई के अंत में होना है।
इससे पहले मयिलादुथुराई के राजस्व मंडल अधिकारी जे बालाजी ने 22 मई को होने वाले कार्यक्रम के लिए प्रतिबंध आदेश जारी किया था। उन्होंने इस प्रथा को 'मानवाधिकारों का उल्लंघन' करार दिया था। जिसके बाद अन्नाद्रमुक, भाजपा और दक्षिणपंथी विपक्ष ने पालकी पर अधीनम ले जाने की प्रथा पर राज्य सरकार के प्रतिबंध का विरोध किया।
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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बुधवार को राज्य सरकार को इस परंपरा पर प्रतिबंध लगाने के अपने आदेश को वापस लेने की चेतावनी दी थी। भाजपा ने कहा था कि अगर सरकार अपना आदेश वापस नहीं लेती तो वे पारंपरिक प्रथा को जारी रखते हुए इसका उल्लंघन करेंगे।
तमिलनाडु भाजपा प्रमुख के अन्नामलाई ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि अगर सरकार धर्मपुरम अधीनम के 'पट्टिना प्रवेशम' का विरोध करती है, तो हम सरकारी नियम तोड़ देंगे। सरकार को अपना आदेश वापस लेना चाहिए। वहीं दूसरी ओर द्रविड़ कड़गम (डीके) ने इस प्रथा के खिलाफ विरोध की चेतावनी दी थी।