तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले के एक मछुआरे ने अपने समुदाय के लिए देश का पहला रेडियो चैनल स्थापित कर दिया है। आर्मस्ट्रांग फर्नांडो नाम के मछुआरे ने 'कदल ओसई एफएम 90.4' शुरू किया है, जो मछुआरों के लिए भारत का पहला और एकमात्र रेडियो चैनल है।
पम्बन के आर्मस्ट्रांग फर्नांडो बचपन से ही रेडियो सुनने के शौकीन थे। फर्नांडो ने 8 वीं कक्षा तक पढ़ाई की है। उनका मछली का कारोबार है। उन्होंने बताया कि किसानों के लिए समर्पित रेडियो चैनल सुनने के बाद उनके मन में विचार आया कि अगर किसान के लिए रेडियो चैनल स्थापित किया जा सकता है तो मछुआरों के लिए क्यों नहीं? इसके बाद ही उन्होंने इस चैनल को स्थापित किया।
उन्होंने इस चैनल के कार्यक्रम के बारे में बताते हुए कहा कि हमारा चैनल विशेष रूप से हमारे समुदाय को समर्पित है, जिसमें हम महिलाओं के लोक गीत, मछुआरों के संगीत एवं हमारे क्षेत्र से संबंधित कार्यक्रमों को प्रस्तुत करते हैं।
आर्मस्ट्रांग ने कहा कि पंबन की लगभग 80 फीसदी आबादी मछली पकड़ने में लगी हुई है। यह उनकी मदद के लिए शुरू किया गया था। हमारी ट्रांसमिशन रेंज अब 5-10 किलोमीटर है। सरकार को पम्बन द्वीप में इसे प्रसारित करने के लिए मजबूत ढांचा बनाना चाहिए।
12 कर्मचारी करते हैं काम
आर्मस्ट्रांग ने बताया कि स्टेशन प्रबंधक गायत्री के अलावा, स्टेशन के 12 अन्य कर्मचारी अंशकालिक मछुआरे या उनके परिवार के सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से छात्रों, गृहिणियों और मछुआरों को शहर में होने वाली दैनिक घटनाओं के बारे में पता चलता है, क्योंकि यह चैनल स्थानीय समुदाय को लाभान्वित करता है।
उन्होंने कहा कि यह सरकार और समुदाय के बीच एक सीधी कड़ी के रूप में भी काम करता है ताकि मछली पकड़ने के लिए सरकारी प्रोत्साहन प्राप्त करने से लेकर लोगों की समस्याओं को जल्दी से हल किया जा सके।