धर्म कभी राष्ट्रीयता नहीं बन सकता: ए राजा
सलेम में जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने भाजपा-आरएसएस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'आज वे हिंदू राष्ट्र की बात कर रहे हैं। पहले हिंदू धर्म के नाम पर कोई राष्ट्र नहीं था। पाकिस्तान भारत से इसलिए अलग हो गया, क्योंकि (विनायक दामोदर) सावरकर ने कहा था कि यह एक हिंदू राष्ट्र है। इसलिए, जिन्ना ने भी कहा कि वे एक अलग इस्लामी राष्ट्र चाहते हैं और फिर (भारत से) अलग हो गए। धर्म कभी राष्ट्रीयता नहीं बन सकता, लेकिन भाषा राष्ट्रीयता बन सकती है।'
'हिंदू नहीं, द्रविड़ और तमिल राष्ट्रवाद की जरूरत'
उन्होंने आगे कहा, 'हम जाति के नाम पर बंटे हुए हैं और आप धर्म के नाम पर हमें एक बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हम कानून के अनुसार धर्म के नाम पर एकजुट होना चाहते हैं। लेकिन, हम हिंदू नहीं बनना चाहते, जैसा कि आप कहते हैं। हम हिंदू राष्ट्रवाद नहीं चाहते हैं। हमें द्रविड़ राष्ट्रवाद और तमिल राष्ट्रवाद की जरूरत है।'
सवाल पूछने पर भेजेते हैं आईटी, सीबीआई और ईडी: कनिमोझी
कार्यक्रम में द्रमुक सांसद कनिमोझी ने कहा, 'हमें उनसे सवाल नहीं करने चाहिए? अगर हम सवाल करते हैं, तो वे हमारे पास आईसीई भेजते हैं। आईसीई का मतलब है- आयकर (इनकम टैक्स), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी)। सवाल पूछेंगे तो ये तीनों आपके पास आ जाएंगे। लेकिन, हम डरने वाले नहीं है। हम आपका और आपकी विचारधारा का विरोध करेंगे। हम बहुत जल्द केंद्र सरकार को बदलेंगे।'
हमारी पहचान मिटाने का प्रयास कर रही भाजपा : एमके स्टालिन
वहीं, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रमुक प्रमुख ने कहा, 'भाजपा हमारी भाषा, तमिल संस्कृति, राज्य के अधिकारों को नष्ट करने की योजना बना रही है। हमारी पहचान को मिटाने का प्रयास कर रही है। दूसरी ओर, अन्नाद्रमुक ने राज्य को दस साल तक बर्बाद किया। एडप्पाडी पलानीस्वामी सोचते हैं कि जो कुछ नष्ट करेंगे, लोग उसे भूल जाएंगे। भाजपा और अन्नाद्रमुक को रोकना हमारी जिम्मेदारी है।'
उन्होंने कहा, आज के पीएम कभी सीएम थे। मोदी सभी राज्यों को बर्बाद करने की कोशिश कर रहे हैं। केंद्र द्वारा जो भी कानून पेश किए जाते हैं, उसके बारे में राज्य सरकारों के साथ कोई चर्चा नहीं की जाती है। राज्यों के मुख्यमंत्रियों से कोई चर्चा नहीं होती।
हम दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के लिए तैयार: उदयनिधि
वहीं मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने कहा, 'हमने राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा (नीट) के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान शुरू किया और 85 लाख हस्ताक्षर जुटाए गए हैं। अगर मुख्यमंत्री मंजूरी देते हैं तो हम दिल्ली में विरोध प्रदर्शन करने के लिए तैयार हैं। अन्नाद्रमुक और तत्कालीन मुख्यमंत्री एडप्पादी पलानीस्वामी का इस्तेमाल करते हुए हमारे राज्य के अधिकारों को केंद्र ने छीन लिया। यह हमारी द्रविड़ सरकार की नीति है कि केवल विदेश मामले और रक्षा केंद्र सरकार के पास होने चाहिए। लेकिन, आज सभी विभाग केंद्र सरकार के हाथ में हैं।'