तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने शनिवार को घोषणा की कि दृष्टिबाधित लोगों सहित दिव्यांगों की पेंशन 1,000 रुपये से बढ़ाकर 1,500 रुपये तक की जाएगी। स्टालिन ने कहा कि उनकी सरकार सभी वर्गों, खासतौर पर हाशिए के लोगों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने कहा, राज्य स्तरीय विशेषज्ञ और उच्च स्तरीय समितियां प्रौद्योगिकी (टेक्नोलॉजी) आधारित ढांचा प्रदान करने की दिशा में काम कर रही हैं, जो सरकारी और निजी क्षेत्रों में दिव्यांग व्यक्तियों को बिना किसी सहारे के स्वतंत्र रूप से काम करने में सक्षम बनाएगी।
स्टालिन अंतरराष्ट्रीय विकलांग दिवस के अवसर पर संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा, दिव्यांग व्यक्तियों को काम करने के लिए कार्यालय जाने की कोई आवश्यकता नहीं है। हम एक ऐसा माहौल बनाने जा रहे हैं, जो घर से काम करने में सुविधा प्रदान करेगा।
दिव्यांगों को तमिलनाडु स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के तत्वावधान में अपस्किल करने और रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए एक नई पहल की जा रही है और इस योजना में जरूरी सॉफ्टवेयर के साथ लैपटॉप प्रदान करना शामिल है। यह पहल 'नान मुधलवन' (मैं पहले हूं) राज्य योजना के तहत कवर की गई है।
उन्होंने कहा, सरकार का लक्ष्य है कि दिव्यांगों को किसी तरह की परेशानी न हो। मुख्यमंत्री ने कहा, एक भी दिव्यां व्यक्ति को कोई शिकायत नहीं होनी चाहिए और अगर किसी पहल से किसी एक विकलांग व्यक्ति को लाभ हो सकता है, तो उसे किया जाना चाहिए।
स्टालिन ने कहा, राजस्व विभाग द्वारा दी जाने वाली पेंशन 1 जनवरी से 1,000 रुपये से बढ़ाकर 1,500 रुपये की जाएगी, जो दृष्टिबाधितों सहित 4,39,315 अलग-अलग दिव्यांग पेंशनरों के लिए प्रभावी होगी। इस कदम से 263.58 करोड़ रुपये का वार्षिक अतिरिक्त व्यय होगा।
उन्होंने दिव्यांगों के लिए मरीना बीच तक एक आसान पहुंच प्रदान करने के लिए बनाए गए विशेष मार्ग का भी जिक्र किया। इस मार्ग का निर्माण ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन के द्वारा किया गया है। स्टालिन ने कहा कि यह उनका अधिकार है और यह सरकार का प्यार का रास्ता है।