तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और डीएमके के बीच सीट बंटवारे को लेकर गतिरोध जारी है। कांग्रेस 45 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, जबकि डीएमके 25 सीटों से अधिक देने को तैयार नहीं। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने 18 में जीत दर्ज की थी। सवाल यह खड़ा हो रहा है कि क्या इससे गठबंधन की ताकत प्रभावित होगी?
तमिलनाडु में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य की सियासत में गर्माहट बढ़ गई है। चुनावी रण में राजनीतिक पार्टियों ने अपनी-अपनी तैयारी भी तेज कर दी है। एक तरफ जहां भाजपा सत्ता में आने के लिए राज्य में नए नए दावे पेश कर रही है। वहीं दूसरी ओर सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर गतिरोध अभी भी जारी है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस 234 में से 45 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, जबकि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की अगुवाई वाली डीएमके 25 से ज्यादा सीटें देने के पक्ष में नहीं है।
बता दें कि बीते रविवार को डीएमके ने सहयोगी दलों के साथ सीट शेयरिंग पर बातचीत शुरू की। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने चेन्नई में स्टालिन से उनके आवास पर करीब 45 मिनट मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस की उम्मीदों और जिन सीटों पर पार्टी चुनाव लड़ना चाहती है, उसकी जानकारी दी।
समझिए तमिलनाडु में एसपीए का समीकरण
गौरतलब है कि तमिलनाडु में डीएमके सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (एसपीए) का नेतृत्व कर रही है। इस गठबंधन में कांग्रेस के अलावा देसिया मुरपोक्कु द्रविड़ कड़गम (डीएमडीके), वामपंथी दल और विदुथलाई चिरुथैगल काची भी शामिल हैं। फिलहाल दोनों दलों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन सीटों की संख्या को लेकर सहमति बनना अभी बाकी है।
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