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पूर्वोत्तर की बात : 31 जिलों में अफ्स्पा पूरी तरह, 12 में आंशिक प्रभावी, इन जिलों को 6 महीने के लिए घोषित किया गया अशांत क्षेत्र

Sat, 02 Apr 2022 04:55 AM IST
योगेश साहू एजेंसी, नई दिल्ली।

सार

असम की अधिसूचना के मुताबिक, 23 जिलों से पूरी तरह और एक उप-संभाग से आंशिक रूप से अफ्स्पा हटा लिया गया है। नौ जिलों- तिनसुकिया, डिब्रूगढ़, चराईदेव, शिवसागर, जोरहाट, गोलाघाट, कारबी आंगलोंग, वेस्ट कारबी आंगलोंग, दिमा हसाओ और कछार जिले के लखीमपुर उप-संभाग में अफ्स्पा लागू रहेगा। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
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विस्तार
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पूर्वोत्तर के बड़े हिस्से से सशस्त्र बल विशेष अधिकार कानून (अफ्स्पा) हटाने के केंद्र के फैसले के बाद यह कानून अब सिर्फ 31 जिलों में पूरी तरह व 12 में आंशिक रूप से प्रभावी है। इन जिलों को 1 अप्रैल से छह महीने के लिए अशांत घोषित किया है। असम, नगालैंड, मणिपुर व अरुणाचल प्रदेश में कुल 90 जिले हैं। 

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अफ्स्पा के तहत किसी क्षेत्र में सैन्य बलों को उपद्रव को शांत करने के लिए विशेष अधिकार हासिल होते हैं और उनके द्वारा की गई कार्रवाई कानूनी जवाबदेही से मुक्त होती है। इसे मेघालय से 2018 में, त्रिपुरा से 2015 और 1980 के दशक में मिजोरम से पूरी तरह हटा लिया गया था। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बृहस्पतिवार को पूर्वोत्तर में अफ्स्पा के तहत घोषित ‘अशांत क्षेत्रों’ की संख्या में कटौती की घोषणा की थी।

गृह मंत्रालय की देर रात जारी दो अधिसूचनाओं के मुताबिक नगालैंड के दीमापुर, नियुलैंड, चूमोकेदिमा, मोन, किफिरे, नोकलाक, फेक, पेरेन और जुन्हेबोटो जिलों को एक अप्रैल से छह महीने के लिए अशांत क्षेत्र घोषित किया है। इसके अलावा कोहिमा, मोकोकचुंग, लोंगलेंग और वोखा जिले के कुछ हिस्सों को अशांत घोषित किया गया है।
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असम के नौ जिलों में लागू रहेगा
असम की अधिसूचना के मुताबिक, 23 जिलों से पूरी तरह और एक उप-संभाग से आंशिक रूप से अफ्स्पा हटा लिया गया है। नौ जिलों- तिनसुकिया, डिब्रूगढ़, चराईदेव, शिवसागर, जोरहाट, गोलाघाट, कारबी आंगलोंग, वेस्ट कारबी आंगलोंग, दिमा हसाओ और कछार जिले के लखीमपुर उप-संभाग में अफ्स्पा लागू रहेगा। 

  • मणिपुर में इंफाल वेस्ट जिले के सात पुलिस थाने, इंफाल ईस्ट जिले के चार थाना क्षेत्र और थुबल, विष्णुपुर काकचिंग तथा जिरीबाम जिले के एक-एक पुलिस थाने ‘अशांत क्षेत्र’ नहीं रहेंगे। 
  • अरुणाचल के 26 जिलों में से तिरप, चांगलांग और लोंगिंग तथा नामसाई में नामसाई और महादेवूर थाना क्षेत्रों को छह महीने के लिए अशांत घोषित किया गया है। 

हथियार डालने की अपील
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को उल्फा-आई समेत अन्य चरमपंथी संगठनों से हथियार डालने की अपील की है। सरमा ने  कहा, मैं चरमपंथी संगठनों से हथियार डालने और विकास में सहयोग की अपील करता हूं।

पूरी तरह हटना चाहिए अफ्स्पा : इरोम
अफ्स्पा के विरोध में 16 साल तक भूख हड़ताल पर बैठने वाली सामाजिक कार्यकर्ता इरोम शर्मिला ने पूर्वोत्तर के कई इलाकों से अफस्पा हटाने के केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने जोर देकर कहा, सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (अफ्स्पा) पूरी तरह हटना बहुत जरूरी है।

मणिपुर की लौह महिला के रूप में मशहूर शर्मिला हमेशा से अफ्स्पा को दमनकारी कानून बताया है। उनका मानना है कि यह कानून कभी भी विद्रोह का समाधान नहीं रहा। इरोम ने कहा, भारत एक लोकतांत्रिक देश है, आखिर कितने लंबे समय तक हम इस औपनिवेशिक कानून को ढोते रहेंगे और कब तक लोग इसके जख्म बर्दाश्त करेंगे।
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मणिपुर के हालात इतने भी बुरे नहीं 
शर्मिला ने कहा, मणिपुर में कानून व्यवस्था के हालात इतने भी बुरे नहीं है जो अफ्स्पा को बरकरार रखा जाए। सिर्फ नौकरशाह और राजनेता इस कानून की आड़ में अपने हित पूरे करते हैं। शर्मिला ने कहा, बल से लोगों का दिल नहीं जीता जाता। सरकार को चाहिए कि वह पूर्वोत्तर के लोगों के दिल से जुड़े। एक बार जब लोगों से रिश्ता जुड़ेगा चीजें अपने आप बेहतर हो जाएंगी। 

विद्रोह से लड़ाई के नाम पर करोड़ों रुपये बर्बाद
शर्मिला ने कहा, विद्रोह से लड़ाई के नाम पर करोड़ों रुपये बर्बाद किए गए। इस रकम का इस्तेमाल अगर पूर्वोत्तर के विकास पर खर्च होता तो आज तस्वीर अलग होती। अफ्स्पा कानून ही विकास की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है। 
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