सरकारी वकील उज्जवल निकम और तहव्वुर राणा
- फोटो : सोशल मीडिया
वरिष्ठ सरकारी वकील उज्जवल निकम का कहना है कि 26/11 हमले के आरोपी तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण, भारत के लिए बड़ी सफलता है। गुरुवार को अमेरिका की अदालत ने तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दी है। पाकिस्तानी मूल के कनाडाई बिजनेसमैन को साल 2020 में भारत की अपील पर अमेरिका में गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद से अमेरिका की अदालत में तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण का मुकदमा चल रहा था।
'भारत के लिए बड़ी सफलता'
उज्जवल निकम का कहना है कि 'तहव्वुर राणा 26/11 के आतंकी हमले का साजिशकर्ता था। लश्कर ए तैयबा के ऑपरेटिव डेविड हेडली ने पूछताछ में तहव्वुर राणा की मुंबई हमले में विस्तार से भूमिका के बारे में बताया था। राणा ने आतंकियों को हमले के लिए लॉजिस्टिक सपोर्ट पहुंचाई, साथ ही वह पाकिस्तानी सेना के संपर्क में भी था। हेडली ने पूछताछ में सब बताया था। मुंबई हमले का आरोपी हेडली जांच के दौरान गवाह बन गया था और मुंबई के सेशन कोर्ट के सामने उसने सब जानकारी दी थी।'
बता दें कि कैलिफोर्निया की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट की मजिस्ट्रेट जैकलीन चूलजियान ने बुधवार को 48 पन्नों का आदेश जारी किया और कहा कि 62 वर्षीय राणा को भारत और अमेरिका के बीच प्रत्यर्पण संधि के तहत प्रत्यर्पित किया जाना चाहिए। भारत और अमेरिका के बीच 25 जून 1997 को अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री आई के गुजराल के शासन में प्रत्यर्पण संधि हुई थी।
13 सालों में भारत लाए गए 60 भगोड़े
तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण का रास्ता साफ होने के साथ ही फरवरी 2002 से एक दशक से अधिक की अवधि में विदेशी सरकारों द्वारा भारत प्रत्यर्पित या निर्वासित किए गए भगोड़ों की संख्या बढ़कर 60 हो गई है। विदेश मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार, फरवरी 2002 से दिसंबर 2015 के बीच विदेशी सरकारों ने अब तक 60 भगोड़ों को या तो भारत प्रत्यर्पित किया है या निर्वासित किया है। इनमें से 11 भगोड़े अमेरिका से, 17 संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से, चार कनाडा और चार थाईलैंड से प्रत्यर्पित किए गए हैं।
1993 के मुंबई बम धमाके के मामले में अपनी भूमिका के लिए उम्रकैद की सजा काट रहे माफिया अबु सलेम को नवंबर 2005 में पुर्तगाल से प्रत्यर्पित किया गया था। वहीं, मुंबई बम हमलों में ही शामिल इकबाल शेख कासकर, इजाज पठान और मुस्तफा अहमद उमर दोसा को 2003 की शुरुआत में यूएई से प्रत्यर्पित किया गया था।