पंजाब अत्यधिक संवेदनशील है क्योंकि राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में गुरुवार को तीसरे दिन भी टिड्डियां देखने को मिलीं। पंजाब के कृषि सचिव केएस पन्नू ने अधिकारियों से कहा कि फजिल्का, बठिंडा और मुक्तसर जिले जो राजस्थान की सीमा से लगते हैं, वे टिड्डियों के हमले से निपटने के लिए कीटनाशकों के पर्याप्त भंडार से लैस है।
हरियाणा और उत्तराखंड सरकारों ने टिड्डी नियंत्रण कार्यों के समन्वय के लिए जिला नियंत्रण कक्ष स्थापित किए हैं। इन राज्यों के अधिकारियों ने कहा कि रसायनों का स्प्रे करने को ड्रोन खरीदे हैं और कीट नियंत्रण कार्यों के लिए रसायनों के साथ दमकलकर्मी और ट्रैकर्स को स्टैंडबाय पर रखा गया है। कर्नाटक के बिदर के किसान भी चिंतित हैं क्योंकि पश्चिमी महाराष्ट्र से टिड्डियां यहां आ सकती हैं। हालांकि राज्य के कृषि मंत्री बीसी पाटिल ने कहा कि हवा के रुख से लगता है कि टिड्डियां कर्नाटक नहीं आएंगी। इसलिए किसानों को डरने की जरूरत नहीं है।
दिल्ली में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने गुरुवार को समीक्षा की। बयान में तोमर के कार्यालय ने कहा कि सरकार हमले को बहुत गंभीरता से ले रही है क्योंकि इससे अगले महीने से शुरू होने वाले खरीफ सीजन को नुकसान हो सकता है। भारत टिड्डियों का मुकाबला करने के लिए नए उपकरण खरीद रहा है। कृषि मंत्री ने ब्रिटेन के माइक्रोन समूह से 60 स्प्रेयर के आयात को मंजूरी दी है, जो छिड़काव उपकरण का निर्माता है। हेलिकॉप्टर्स को भी तैयार रखा गया है।