हाथी छोड़कर गए स्वामी प्रसाद मौर्या को साथी की तलाश है। उनकी नजर दूसरे राज्यों में प्रभाव रखने वाली क्षेत्रीय पार्टियों पर भी है। पिछले दिनों इस सिलसिले में उनकी मुलाकात दिल्ली में एनडीए की सहयोगी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष और केंद्रीय राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा से हुई।
मौर्या का कहना है कि वे कुशवाहा की चाय पीने गए थे। उनका कहना है कि 22 सितंबर को लखनऊ में होने जा रही रैली के बाद कोई फैसला लेंगे। बसपा से हटने के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य अन्य राजनीतिक पार्टियों में चर्चा का विषय तो बने हैं लेकिन नफा-नुकसान में कोई फैसला नहीं हो रहा है। मौर्या खुद भी ऐसा प्लेटफार्म चाह रहे हैं जहां से सीधे तौर पर बसपा की खिलाफत कर सकें। जातिगत राजनीति की ताकत से बसपा में अपना कद बढ़ाने वाले मौर्य को फिलहाल एनडीए के करीब जाने में फायदा दिख रहा है।
दिल्ली में उपेंद्र कुशवाहा से मुलाकात के स्पष्ट्र राजनीतिक मायने हैं लेकिन मौर्या फिलहाल इंकार करते हैं। उनका कहना है कि ये मुलाकात सिर्फ चाय और कुछ इधर-उधर की चर्चा तक सीमित है। मौर्या से करीबी को लेकर प्रदेश भाजपा के नेता एकमत नहीं हैं। जबकि केंद्रीय नेता कहीं न कहीं मौर्या को फायदे का सौदा मानते हैं।
भाजपा खुद पर सीधे तौर पर जातिगत राजनीति का ठप्पा भी नहीं लगने देना चाहती है। ऐसे में एनडीए के सहयोगी दल की मदद से मौर्या को राजनीतिक गलियारा देने से पिछड़ा वर्ग से जुड़ी यूपी की कुछ विधानसभा सीटों मे इसका लाभ मिल सकता है। मौर्या के बहाने यूपी में उपेंद्र कुशवाहा को भी अपनी पार्टी को पहचान दिलाने में मदद मिलेगी।