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यशवंत सिन्हा के जरिए अब संघ की संस्था ने सरकार के विकास मॉडल पर उठाए सवाल

Thu, 28 Sep 2017 07:34 PM IST
संजय मिश्र/ अमर उजाला, नई दिल्ली।
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पूर्व वित्त मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता यशवंत सिन्हा के जरिए देश की वर्तमान अर्थव्यस्था पर सवाल उठाए जाने के बाद संघ की संस्था स्वदेशी जागरण मंच ने सरकार के विकास मॉडल पर ही सवाल उठा दिया है।
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स्वदेशी जागरण के राष्ट्रीय सह संयोजक अश्विनी महाजन ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि अर्थव्यवस्था में सुस्ती का दौर अस्थाई है। कुछ अहम कदम उठाने के बाद यह दौर ठीक हो जाएगा।

लेकिन देश का विकास वर्तमान मॉडल के बदौलत नहीं हो सकता है। पूरे विकास मॉडल को ही बदलने की जरूरत है। हमें पश्चिमी और अमेरिकन मॉडल पर चलने के बजाय दीन दयाल उपाध्याय और दत्तोपंत ठेंगडी का स्वदेशी मॉडल अपनाना होगा।
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पूर्व वित्त मंत्री सिन्हा के आरोपों पर महाजन ने कहा कि जब भी कोई बड़ी व्यवस्था लागू की जाती है तो उसका आंशिक असर रहता है। अर्थव्यवस्था में बदलाव के लिए जीएसटी जैसी बडी व्यवस्था लागू हुई है। इससे कुछ दिनों तक सुस्ती रहेगी।

इससे उबरने के लिए भी कई कदम सरकार को उठाने पड़ेंगे। यदि जीएसटी में छोटे और मझौले उद्योगों को जल्द राहत दे दी जाती है। तो सुस्ती का असर जल्द खत्म हो जाएगा और अर्थव्यवस्था रफ्तार से कुलाचें भरेगी। 

सरकार के वर्तमान विकास मॉडल में क्या है खामी
स्वदेशी जगारण मंच के राष्ट्रीय सह संयोजक अश्विनी महाजन के अनुसार विकास का वर्तमान मॉडल केवल जीडीपी ग्रोथ केंद्रीत बनकर रह गया है। सरकार को लगता है कि जीडीपी दर बढने से देश का विकास हो जाएगा, तो यह गलत है।

अमेरिका समेत कई पश्चिमी देशों ने भी कहा है कि हमें अपनी नीतियों को अपने अनुसार बनाना होगा। विकास के असर को आम आदमी तक पहुंचाना पडे़गा।

वर्तमान विकास मॉडल में जीडीपी की दर तो बढ रही है। मगर रोजगार के अवसर नहीं पैदा हो रहे हैं। इसका लाभ गरीब आदमी के बजाय अमीरों को हो रहा है। हमें विकास के असर को गरीब, किसान और बेरोजगारों तक पहुंचाना होगा। 

वर्तमान विकास मॉडल को स्वदेशी की खरी-खरी 
देश के वर्तमान विकास मॉडल को खरी-खरी सुनाते हुए स्वदेशी जागरण मंच के सह संयोजक अश्विनी महाजन ने कहा कि अर्थव्यवस्था में रफ्तार देने के लिए सरकार बुस्टर डोज देने की बात कर रही है। लेकिन इससे कुछ खास असर नहीं होगा।

सरकार को तय करना पडेगा की उसे अमेरिका मॉडल और जगदीश भगवती तथा अरविंद पनगडिया के सुझाए विकास मॉडल पर चलना है अथवा देश के दीनदयाल और दत्तोपंत ठेंगडी के मॉडल पर चलना है।

दीनदयाल ने आम आदमी के विकास की बात करते हुए विकास के असर को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का मॉडल दिया है। इसमें शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास पर जोर है।

लेकिन देश के वर्तमान विकास मॉडल जिसमें जीडीपी बढाने पर जोर है से अधिकांश अमीरों को ही लाभ हुआ है। रोजगार के नए अवसर नहीं पैदा हो रहे हैं।

एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए महाजन ने कहा कि बीते तीन वर्षों में अंबानी की आय में तीन गुना बढोत्तरी हुई है। जबकि इस तेजी से आम आदमी के आय में बढोत्तरी होनी चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हो सका है। 



 
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मंच का आरोप वर्तमान अर्थव्यवस्था से केवल अमीरों को लाभ 

स्वदेशी जागरण मंच का आरोप है कि वर्तमान अर्थव्यवस्था से केवल अमीरों को ही लाभ हुआ है। एक ब्रिटिश लेखक की रिपोर्ट ब्रिटिश रूल से बिलिनियरी राज का हवाला देते हुए अश्विनी महाजन ने कहा कि रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 1980 से 2014 के बीच देश के केवल 10 प्रतिशत लोगों की जेब में अर्थव्यवस्था का लाभ पहुंचा है।

इसमें भी मात्र 1 प्रतिशत लोगों ने 29 प्रतिशत अर्थव्यवस्था का लाभ उठाया है। अमर उजाला के जरिए पूछे सवाल की केंद्र सरकार हमेशा यही बात कहती है कि उसका हर कार्य गरीबों के विकास के लिए है, इसके जवाब में मंच सह संयोजक ने कहा कि उज्जवला, जनधन और मुद्रा योजना सरीखे काम गरीबों के हित में जरूर हुए हैं।

लेकिन गरीबों को विकास की मुख्य भूमिका में भागीदार बनाना होगा। जीडीपी का लाभ केवल अमीरों और कॉरपोरेट को पहुंचाने के बजाय आम आदमी और गरीब के हित में विकास कार्य करने की जरूरत है। ऐसे कदम उठाने पड़ेंगे जिससे रोजगार के अवसर बढें। वर्तमान मॉडल से रोजगार नहीं बढ रहा है। 

अमीरों के बजाय गरीबों पर ध्यान दे सरकार, स्वदेशी आधारित नीति की जरूरत
स्वदेशी जागरण मंच का कहना है कि सरकार हर वर्ष करीब 5 लाख करोड रूपया बतौर स‌ब्‍सिडी के रूप में अमीरों और कॉरपोरेट घरानों को देती है। इसका बंटवारा गरीबों के बीच होना चाहिए।

अमर उजाला से बातचीत में मंच के सह संयोजक महाजन ने कहा कि हमने तीन साल खराब किए हैं। वर्तमान विकास मॉडल के जरिए होने वाला विकास स्थायी नहीं रहेगा।

हमें देश के स्थायी विकास की राह तलाशते हुए स्वदेशी मॉडल को अपनाना होगा। सरकार को बडे कॉरपोरेट और अमीरों को छूट देने के बजाय गरीब और छोटे लोगों के विकास पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

लघु एवं मझौले उद्योगों को छूट दिया जाना चाहिए। इससे बेरोजगारी की समस्या दूर होगी। कम पूंजी में लघु उद्योग रोजगार के ज्यादा अवसर प्रदान करते हैं।

जीएसटी में लघु उत्पादों को छूट देने के साथ इसकी कंपोजिट सीमा बढानी चाहिए। हमने वित्त मंत्री से भी कहा है कि वे अमीरों और बडे कारपोरेट को दिए जाने वाले छूट को जनता से छिपाने के बजाय उनके सामने रखें।

सरकार ने निर्णय लिया है कि वह सब्सिडी के जरिए दिए जाने वाले छूट को सार्वजनिक नहीं करेगी।
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