ये कहानी थोड़ी फिल्मी है। अक्सर अगर किसी कंपनी से किसी कर्मचारी को बार-बार निकाला जाए तो वो हार मान लेता है और दूसरी राह पकड़ लेता है लेकिन कर्नाटक सिल्क इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन में काम करने वाले 49 साल के वाईएन कृष्णमूर्ति को कॉरपोरेशन बार-बार नौकरी से निकाला जाता रहा और वो बार बार कोर्ट का दरवाजा खटखटाते रहे और नौकरी वापस पाते रहे। साथ ही कंपनी से मुआवजा भी लेते रहे।
मूर्ति ने 11 सितंबर 1987 को असिस्टेंट सेल्स ऑफिसर के पद पर कार्यभार संभाला था। कंपनी ने उन्हें पहले साल प्रोबेशन पर रखा लेकिन प्रदर्शन अच्छा न कह कर उनका प्रोबेशन पीरियड 1994 तक बढ़ा दिया। उसके बाद उन्हें नौकरी से भी निकाल दिया। मूर्ति कॉरपोरेशन के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। केस चला और मूर्ति को उनकी नौकरी वापस मिल गई।
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इसके बाद तो कॉरपोरेशन बार बार उन्हें निकालती रही और वो बार बार कोर्ट का दरवाजा खटखटाते रहे। यह सिलसिला करीब 30 सालों तक चला। मूर्ति को कॉरपोरेशन खराब व्यवहार बताकर नौकरी से निकाला था।