विधानसभा चुनाव से पहले नशे के कारोबार को न रोक पाने और सत्ता विरोधी लहर की संभावनाओं के बीच शिरोमणि अकाली दल (शिअद) सतलुज यमुना लिंक नहर (एसवाईएल) को भावनात्मक मुद्दा बनाने की तैयारी में है।
विधानसभा में पहले ही एसवाईएल विरोधी बिल पारित करा चुकी बादल सरकार और उनकी पार्टी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से पक्ष में निर्णय न आने पर सत्ता की कुर्बानी देने पर गंभीर मंथन कर रही है।
शिअद के एसवाईएल पर भावी रुख की भनक लगने से भाजपा असमंजस में है। चूंकि भाजपा पंजाब सरकार में शामिल है, इसलिए उसे लगता है कि इस फैसले का नुकसान उसे हरियाणा में उठाना पड़ सकता है।
गौरतलब है कि एसवाईएल मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अंतिम दौर में है। इस मामले के पक्षकारों में शामिल हरियाणा, पंजाब ने अपना पक्ष सर्वोच्च अदालत में रख दिया है।
शिअद के एक वरिष्ठ सांसद के मुताबिक एसवाईएल मुद्दे पर सियासत के अचानक गरम होने के बाद पार्टी इस मामले में गंभीर मंथन कर रही है।
पार्टी के एक मजबूत धड़े का सुझाव है कि सुप्रीम कोर्ट से पंजाब के हक में फैसला न आने पर सरकार की कुर्बानी दे देनी चाहिए। इससे पूरा चुनाव राज्य की अस्मिता से और सम्मान पर केंद्रित हो जाएगा। चूंकि राज्य विधानसभा का कार्यकाल महज 8 महीने ही बाकी बचा है।
फिर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने में अभी कुछ और समय लग सकता है। इसलिए इस छोटे से अंतराल के लिए सत्ता का त्याग करना सियासी रूप से ज्यादा फायदेमंद होगा। उक्त सांसद के मुताबिक हालांकि इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
शिअद ने हालांकि भाजपा के साथ इस मुद्दे पर आधिकारिक चर्चा नहीं की है, मगर भाजपा को शिअद के भावी रुख की भनक है। शिअद अगर ऐसा निर्णय करती है तो भाजपा की पंजाब इकाई तो उसके साथ रहेगी, मगर भाजपा नेतृत्व को हरियाणा में स्थिति संभालने में परेशानी होगी। भाजपा के लिए मुश्किल यह है कि पंजाब में वह जहां सरकार में शिअद की सहयोगी है, वहीं हरियाणा में उसकी सरकार है।