26 दिसंबर 2019 को इस साल का आखिरी सूर्य ग्रहण लगेगा। यह खंडग्रास सूर्यग्रहण है और यह सूर्य ग्रहण गुरुवार के दिन पौष मास की अमावस्या पर सुबह 08:17 मिनट से लेकर 10:57 मिनट तक रहेगा।
| शहर | ग्रहण शुरू होगा | चरम | खत्म होगा |
| नई दिल्ली | 08:17:01 | 09:30:53 | 10:57:07 |
| चंडीगढ़ | 08:19:48 | 09:37:29 | 10:54:31 |
| श्रीनगर | 08:22:51 | 09:30:22 | 10:48:11 |
ग्रहण के दौरान सूर्य को नग्न आंखों से देखना आंखों की सेहत के लिए नुकसानदेह होता है। इसके लिए केवल ऐसे चश्मे उपयोग किया जाना चाहिए जो आईएसओ 12312-2 सर्टिफाइड हों, यह सुझाव अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने जारी किया है। इसके अलावा वेल्डिंग के दौरान उपयोग होने वाले चश्मे या पिनहोल प्रोजेक्टर का उपयोग कर सकते हैं।
सूर्यग्रहण के दौरान खाना, पीना और अपने रोजमर्रा के काम करना सुरक्षित है। इससे कोई नुकसान नहीं होता।
गुरुवार को सूर्यग्रहण के दौरान सूर्य एक आग के छल्ले जैसा नजर आएगा। इसका कारण यह है कि इन दिनों सूर्य पृथ्वी के अपेक्षाकृत निकट है जबकि कि चंद्रमा दूर है। अत: चंद्रमा सूर्य को पूरा नहीं ढक पाएगा और इसकी परिधि नजर आती रहेगी।
नैनीताल के आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेस के वैज्ञानिक शशिभूषण पांडे के मुताबिक एन्युलर सूर्यग्रहण की विशेषता होती है कि इसमें चंद्रमा सूर्य की परिधि के अलावा शेष भाग को ढक लेता है। इसे केवल इसकी परिधि रिंग ऑफ फायर जैसी दिखाई देती है। हालांकि यह नजारा दक्षिण भारत के कुछ शहरों में ही बनेगा।
शेष स्थानों से आंशिक सूर्यग्रहण दिखेगा। भारत में इससे पहले एन्यूलर सूर्य ग्रहण 15 जनवरी 2010 को देखा गया था और अगला 21 जून 2020 को दिखाई देगा। खास बात है कि अगले 100 वर्षों में भारत से केवल छह सूर्यग्रहण ही देखे जा सकेंगे। यह वर्ष 2020, 2031, 2034, 2064, 2085 तथा 2114 में दिखाई देंगे।