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नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के जाम गैंग से खौफ खाते हैं बड़े-बड़े अधिकारी, इस तरह चलता है गोरखधंधा!

Wed, 25 Dec 2019 06:22 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
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New Delhi Railway Station Jam - फोटो : AmarUjala
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नई दिल्ली रेलवे स्टेशन का एक भाग पहाड़गंज में खुलता है और दूसरा अजमेरी गेट। पहाड़गज में गेट के पास ही रेलवे के सीसीएम, डिप्टी सीसीएम बैठते हैं। सभी रेलवे स्टेशन के जाम गैंग से परेशान हैं, लेकिन यह गैंग इतना खतरनाक है कि इसके आगे उनकी एक नहीं चल पाती। जाम गैंग रिश्वत खोरी के बूते पहाड़गज रोड पर रेलवे स्टेशन के मुख्य गेट के पास जाम लगवा देता है। गाड़ियों की बड़ी सी लाइन बन जाती है।
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यह सिलसिला हर रोज दोपहर में शुरू होता है और शाम पांच बजकर बीस मिनट तक चलता है। इसके बाद यातायात अपने आप स्मूथ हो जाता है। इस दौरान ही जाम गैंग का पूरा नेटवर्क हजारों रुपये का वारा न्यारा कर देता है।

शताब्दी, राजधानी का टाइम और मोटी कमाई

दरअसल यह समय नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से कई शताब्दी और राजधानी के जाने का होता है। इन ट्रेनों में आमतौर पर मध्यम, उच्च आयवर्ग के लोग यात्रा करते हैं। शताब्दी और राजधानी की अधिकतर सवारी टैक्सी या अपनी कार से आती है। पहाड़गज गेट पर लंबी लाइन के कारण उसे ट्रेन छूटने का डर रहता है। यहां से स्टेशन का गेट कोई 50 से 100 मीटर दूर होता है और प्लेटफार्म की दूरी भी रहती है। सड़क पर घूम रहे कुली को इसी क्षण की तलाश रहती है।

तमाम अनाधिकृत लोग भी इस धंधे में लगे रहते हैं और अपने हिसाब से ट्रेन तक पहुंचाने की कीमत आसानी से वसूल लेते हैं। रेलवे के अधिकारी खुद बताते हैं कि यह नेटवर्क उनकी नाक के ठीक नीचे ऑपरेट होता है और वह चाहकर भी इसे दूर नहीं कर पाते। बताते हैं यदि ज्यादा कंप्लेन करें तो खुद पर गैंग के लोगों ती तरफ से हमले का भी अंदेशा बना रहता है।

कैसे आपरेट करता है गैंग

समय होते ही आटो रिक्शा, टेंपो या गाड़ियां आड़ी, तिरछी लगने लगती हैं। इसे लगवाने वाले लोग और आटो रिक्शा या अन्य गाड़ियां सब पहले से अपनी-अपनी ड्यूटी के हिसाब से काम करते हैं। ताकि इस दौरान यातायात धीमा हो जाए और धीरे-धीरे रुकता जाए। इस समय ट्रैफिक पुलिस या दिल्ली पुलिस भी गेट के पास से दूरी बना लेती है। रेलवे स्टेशन के गेट के आस-पास सामान लेकर रेलवे स्टेशन पहुंचने वाले लोगों की अचानक संख्या बढ़ जाती है।

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यह सीसीएएम आफिस से लेकर रेलवे टिकट बनाने के कार्यालय गेट तक फैल जाते हैं। आरपीएफ के लोगों के तैनाती की एक सीमा है। वहीं कुछ सीआईएसएफ के जवान इस क्षेत्र को अपनी ड्यूटी से बाहर बता देते हैं। बताते हैं चंद घंटों के भीतर सामान लेकर गाड़ी पहुंचाने वाला कुली या नॉन कुली गैंग हजारों रुपये कमा लेता है।

जब रेलवे अधिकारी से पूछा, कौन सी गाड़ी पकड़नी है

रेलवे के एक बड़े अधिकारी का दफ्तर में पहला दिन था। वह दोपहर में बड़ौदा हाऊस से गाड़ी से आए। कार्यालय के आगे तक गाड़ियों की लाइन देखी तो उतर गए। सोचा पैदल ही कार्यालय चले जाएं, ड्राइवर गाड़ी लेकर आएगा। इतने में लोगों ने तपाक से घेर लिया। पूछा साहब कौन सी गाड़ी पकड़नी है। वह चौंक गए। उनके साथ शुरू में दो-तीन बार ऐसा हुआ, लेकिन बाद में जब जाम गैंग के लोगों ने पहचान लिया, तो पूछना बंद कर दिया।

सूत्रों का कहना है कि उन्होंने दफ्तर में अन्य कर्मियों से बात की, तो उन्हें जाम गैंग के बारे में पता चला। इसके बाद उन्होंने भी जाम गैंग को हटाने के लिए प्रयास किया, लेकिन 10-15 दिन बाद स्थिति फिर जस की तस हो गई।

 

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