एक सर्वे के मुताबिक राज्यसभा अपना 40 फीसदी वर्किंग टाइम (कार्यात्मक समय) सार्वजनिक महत्व के मुद्दों पर बिताता है। वहीं, 32 फीसदी समय एग्जिक्यूटिव की जवाबदेही सुनिश्चित करने और 28 फीसदी समय कानून बनाने में बिताता है।
उच्च सदन की तरफ से समय के उपयोग का यह पैटर्न राज्यसभा सचिवालय की तरफ से 1978 से 41 साल की अवधि के लिए किए गए विश्लेषण का एक परिणाम है, जिसके लिए आवश्यक डेटा उपलब्ध है।
यह ट्रेंड एनालिसिस राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू की तरफ से सदन के अपने तीन कार्यों- विधायी, निरीक्षण और विचार-विमर्श पर खर्च किए गए समय का विवरण जानने के लिए किया गया था।
जबकि 1978-2018 के दौरान बजट पर आम चर्चा राज्यसभा के कुल कार्यात्मक समय के 7.08 फीसदी का हिस्सा लेती है, वहीं, प्रस्ताव पर धन्यवाद का हिस्सा 4.36 फीसदी पर आता है, विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज पर चर्चा करने में 3.93 फीसदी का समय खर्च होता है।